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Home Health Blog | July 20, 2026 | 10 min read

पैरों की नसों का फूलना (Varicose Veins): कारण, लक्षण और इलाज

पैरों की नसों का फूलना (Varicose Veins): कारण, लक्षण और इलाज

क्या आपके पैरों की पिंडली या जांघ पर नीली-हरी, उभरी हुई और टेढ़ी-मेढ़ी नसें दिखाई देने लगी हैं? क्या देर तक खड़े रहने के बाद पैरों में भारीपन, थकान और सूजन महसूस होती है? पैरों की नसों का फूलना (Varicose Veins / वैरिकोस वेन्स) एक आम लेकिन धीरे-धीरे बढ़ने वाली समस्या है, जिसमें पैरों की नसों के अंदर मौजूद वाल्व कमजोर पड़ जाते हैं और खून का बहाव उल्टी दिशा में जमा होने लगता है। यह समस्या खासकर घंटों खड़े रहकर काम करने वालों, मोटापे से ग्रस्त लोगों, गर्भवती महिलाओं और बढ़ती उम्र के लोगों में देखी जाती है। सही समय पर ध्यान न देने पर यह त्वचा का रंग बदलने और घाव (venous ulcer) तक पहुंच सकती है। आइए इसके कारण, लक्षण, बचाव और आधुनिक इलाज को विस्तार से समझें।

"वैरिकोस वेन्स सिर्फ दिखने में खराब नसें नहीं हैं — यह पैरों की नसों के वाल्व कमजोर होने और खून का प्रवाह बिगड़ने का संकेत है, जिसे शुरुआत में ही संभालना सबसे आसान होता है।"

पैरों की नसें फूलने के कारण

हमारे पैरों की नसों में छोटे-छोटे एकतरफा वाल्व (valves) होते हैं, जो खून को नीचे से ऊपर, हृदय की ओर बहाने में मदद करते हैं और उसे वापस नीचे गिरने से रोकते हैं। जब ये वाल्व कमजोर या खराब हो जाते हैं, तो खून का उल्टा बहाव होकर नसों में जमा होने लगता है, जिससे नसें फूल जाती हैं। इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार होते हैं:

1. नसों के वाल्व कमजोर होना (Faulty Valves)

यह वैरिकोस वेन्स का सबसे मुख्य कारण है। जब नसों के अंदर के वाल्व ठीक से बंद नहीं होते, तो खून ऊपर जाने के बजाय वापस नीचे जमा होने लगता है। इस जमाव (pooling) से नस पर दबाव बढ़ता है और वह धीरे-धीरे फूलकर उभरी और टेढ़ी दिखने लगती है।

2. देर तक खड़े रहना

जिन लोगों को अपने काम की वजह से घंटों लगातार खड़े रहना पड़ता है — जैसे शिक्षक, दुकानदार, सुरक्षाकर्मी, नर्स या फैक्ट्री कर्मचारी — उनके पैरों की नसों पर लगातार दबाव बना रहता है। इससे वाल्व जल्दी कमजोर होते हैं और नसें फूलने लगती हैं।

3. मोटापा (Obesity)

शरीर का अतिरिक्त वजन सीधे पैरों की नसों पर दबाव डालता है। ज्यादा वजन होने से नसों को खून ऊपर की ओर धकेलने में अधिक मेहनत करनी पड़ती है, जिससे वाल्व कमजोर होकर नसें फूल जाती हैं।

4. गर्भावस्था (Pregnancy)

गर्भावस्था के दौरान शरीर में खून की मात्रा बढ़ जाती है और बढ़ता हुआ गर्भाशय पेट व पैरों की नसों पर दबाव डालता है। साथ ही हार्मोन में बदलाव नसों की दीवारों को ढीला कर देता है, जिससे कई महिलाओं में वैरिकोस वेन्स दिखने लगती हैं। हालांकि प्रसव के बाद अक्सर यह समस्या कुछ हद तक कम हो जाती है।

5. बढ़ती उम्र (Ageing)

उम्र बढ़ने के साथ नसों और उनके वाल्व की लचक (elasticity) कम होने लगती है। कमजोर पड़ती नसें खून को ऊपर धकेलने में उतनी सक्षम नहीं रहतीं, इसलिए बढ़ती उम्र में वैरिकोस वेन्स होने की संभावना बढ़ जाती है।

6. अनुवांशिकता (Family History)

अगर आपके माता-पिता या करीबी परिवार में किसी को वैरिकोस वेन्स की समस्या रही है, तो आपको भी यह होने की संभावना अधिक रहती है। कमजोर नसों की बनावट अक्सर आनुवंशिक रूप से आगे बढ़ती है।

7. कब्ज और लंबे समय तक जोर लगाना

पुरानी कब्ज (constipation) में मल त्याग के समय बार-बार जोर लगाने से पेट और पैरों की नसों पर दबाव बढ़ता है। यह लगातार दबाव भी नसों के वाल्व को कमजोर बनाकर वैरिकोस वेन्स की समस्या को बढ़ा सकता है।

लक्षण

वैरिकोस वेन्स के लक्षण शुरुआत में हल्के होते हैं और धीरे-धीरे बढ़ते हैं। समय रहते इन्हें पहचानना जरूरी है:

  • पैरों की त्वचा पर नीली, हरी या गहरी उभरी हुई, टेढ़ी-मेढ़ी नसें दिखना।
  • देर तक खड़े रहने या बैठने के बाद पैरों में भारीपन और थकान महसूस होना।
  • पैरों, खासकर टखनों और पिंडली में पैरों में सूजन होना।
  • फूली हुई नसों के आसपास खुजली होना — इसके बारे में विस्तार से जानने के लिए हमारा लेख पैरों में खुजली होना पढ़ें।
  • रात में पैरों में ऐंठन या क्रैम्प (cramps) आना और बेचैनी।
  • पैरों में हल्का दर्द या जलन, जो शाम के समय बढ़ जाता है।
  • लंबे समय बाद प्रभावित हिस्से की त्वचा का रंग गहरा या भूरा होना।

कई बार पैरों की नसों में खिंचाव या दर्द को लोग सामान्य थकान समझ लेते हैं। नस से जुड़ी अन्य समस्याओं जैसे नस चढ़ना को समझने के लिए यह लेख भी उपयोगी है।

जांच (Diagnosis)

वैरिकोस वेन्स की गंभीरता और खून के बहाव की स्थिति जानने के लिए डॉक्टर कुछ जांचें करते हैं:

  • शारीरिक जांच: डॉक्टर खड़ी अवस्था में पैरों की उभरी नसों, सूजन और त्वचा के रंग को देखकर आकलन करते हैं।
  • डॉपलर अल्ट्रासाउंड (Doppler Ultrasound): यह सबसे महत्वपूर्ण जांच है, जिसमें नसों के अंदर खून के बहाव और वाल्व के काम करने की स्थिति का सटीक पता चलता है।
  • डुप्लेक्स स्कैन: नसों की बनावट और रक्त प्रवाह का विस्तृत चित्र देखने के लिए, ताकि इलाज की सही योजना बनाई जा सके।
  • सामान्य ब्लड टेस्ट: यदि जरूरी हो, तो इलाज या ऑपरेशन से पहले शरीर की सामान्य स्थिति जांचने के लिए।

घरेलू उपाय और बचाव

शुरुआती अवस्था में जीवनशैली में कुछ बदलाव और सावधानियां वैरिकोस वेन्स को बढ़ने से रोकने में बहुत मदद करती हैं। ध्यान रहे — ये उपाय समस्या को नियंत्रित रखने में सहायक हैं, गंभीर स्थिति में डॉक्टरी इलाज का विकल्प नहीं:

1. कम्प्रेशन स्टॉकिंग्स पहनना

डॉक्टर की सलाह से पहनी गई मेडिकल कम्प्रेशन स्टॉकिंग्स पैरों की नसों पर हल्का दबाव बनाकर खून को ऊपर की ओर बहने में मदद करती हैं। यह भारीपन, सूजन और थकान को काफी कम कर देती हैं।

2. पैर ऊँचे करके लेटना

दिन में कुछ बार पैरों के नीचे तकिया रखकर उन्हें हृदय के स्तर से थोड़ा ऊँचा करके लेटें। इससे जमा हुआ खून वापस बहने लगता है और नसों पर दबाव कम होता है।

3. वजन नियंत्रण और नियमित पैदल चलना

संतुलित आहार से वजन को नियंत्रित रखें और रोजाना पैदल चलें। चलने से पिंडली की मांसपेशियां सिकुड़ती-फैलती हैं, जो नसों में खून को ऊपर धकेलने में मदद करती हैं। तैराकी और साइकिलिंग भी अच्छे विकल्प हैं।

4. देर तक खड़े या बैठे न रहना

अगर काम में लंबे समय तक खड़े रहना पड़ता है, तो बीच-बीच में थोड़ा चलें और पैरों को हिलाते-डुलाते रहें। इसी तरह देर तक एक ही स्थिति में बैठें नहीं और पैरों पर पैर चढ़ाकर बैठने से बचें।

5. कब्ज से बचाव और संतुलित आहार

फाइबरयुक्त भोजन, हरी सब्जियां, फल और पर्याप्त पानी लें ताकि कब्ज न हो और मल त्याग के समय जोर न लगाना पड़े। कम नमक वाला संतुलित आहार सूजन को भी कम रखता है।

आधुनिक इलाज

अगर समस्या बढ़ जाए या लक्षण परेशान करने लगें, तो आज कई सुरक्षित और आधुनिक इलाज उपलब्ध हैं। हल्के मामलों में कम्प्रेशन स्टॉकिंग्स और जीवनशैली में बदलाव से राहत मिलती है। छोटी फूली नसों के लिए स्क्लेरोथेरेपी (Sclerotherapy) में एक खास दवा इंजेक्ट करके नस को बंद किया जाता है। बड़ी नसों के लिए बिना बड़े चीरे वाली आधुनिक तकनीक लेजर उपचार / EVLT (Endovenous Laser Treatment) बहुत असरदार है, जिसमें नस को अंदर से बंद कर दिया जाता है और मरीज जल्दी सामान्य जीवन में लौट आता है। गंभीर मामलों में सर्जरी की सलाह दी जा सकती है। कौन-सा इलाज सही रहेगा, यह डॉपलर जांच और नसों की स्थिति देखकर विशेषज्ञ सर्जन ही तय करते हैं। हमारे हमारे विभाग में इन सभी आधुनिक सुविधाओं की जानकारी उपलब्ध है।

क्या करें और क्या न करें (Do's & Don'ts)

क्या करें (Do's)क्या न करें (Don'ts)
डॉक्टर की सलाह से कम्प्रेशन स्टॉकिंग्स पहनें।घंटों लगातार एक ही जगह खड़े या बैठे न रहें।
रोजाना पैदल चलें और पैरों की हल्की एक्सरसाइज करें।बहुत टाइट कपड़े या ऊँची एड़ी वाले जूते न पहनें।
आराम करते समय पैरों को ऊँचा रखें।पैरों पर पैर चढ़ाकर लंबे समय तक न बैठें।
वजन नियंत्रित रखें और फाइबरयुक्त आहार लें।फूली नसों को जोर से रगड़ें या खरोंचें नहीं।

डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?

अगर किसी फूली हुई नस से अचानक खून बहने लगे, पैर की त्वचा का रंग बदलकर गहरा या भूरा हो जाए, नस के पास ऐसा घाव बन जाए जो भरने का नाम न ले (venous ulcer), या पैर में तेज दर्द के साथ अचानक सूजन और गर्माहट हो — तो घरेलू उपायों पर निर्भर न रहें। यह वैरिकोस वेन्स के गंभीर होने या नस में खून का थक्का (clot) जमने का संकेत हो सकता है, जिसके लिए किसी अनुभवी डॉ. नीलेश गोयल जैसे विशेषज्ञ सर्जन से तुरंत जांच जरूरी है।

निष्कर्ष

पैरों की नसों का फूलना एक ऐसी समस्या है, जिसे शुरुआत में नजरअंदाज करना आगे चलकर सूजन, दर्द, त्वचा के रंग बदलने और घाव तक पहुंचा सकता है। अच्छी बात यह है कि सही समय पर जीवनशैली में बदलाव, कम्प्रेशन स्टॉकिंग्स और आधुनिक इलाज से इस पर पूरी तरह काबू पाया जा सकता है। अगर आपके पैरों में उभरी नसें, भारीपन या लगातार सूजन रहती है, तो इसे टालें नहीं और समय रहते विशेषज्ञ से सलाह लें।

संकल्प हॉस्पिटल (अंबिकापुर) का जनरल एवं लैप्रोस्कोपिक सर्जरी विभाग वैरिकोस वेन्स की जांच (डॉपलर अल्ट्रासाउंड) से लेकर स्क्लेरोथेरेपी, लेजर उपचार (EVLT) और सर्जरी जैसे आधुनिक इलाज के लिए पूरी तरह सुसज्जित है। हमारे विशेषज्ञ डॉक्टर आपकी समस्या के मूल कारण का पता लगाकर सटीक और सुरक्षित इलाज देते हैं। परामर्श के लिए आज ही संपर्क करें या हमारे वरिष्ठ जनरल सर्जन डॉ. नीलेश गोयल से मिलें।

Frequently Asked Questions

पैरों की नसें फूलने का मुख्य कारण नसों के अंदर मौजूद वाल्व का कमजोर होना है। जब ये वाल्व ठीक से बंद नहीं होते, तो खून ऊपर हृदय की ओर जाने के बजाय नसों में उल्टा बहकर जमा होने लगता है, जिससे नसें फूलकर उभरी और टेढ़ी दिखने लगती हैं। देर तक खड़े रहना, मोटापा, गर्भावस्था, बढ़ती उम्र, अनुवांशिकता और कब्ज इसे बढ़ाने वाले प्रमुख कारण हैं।

हाँ, शुरुआती और हल्के मामलों में वैरिकोस वेन्स को बिना ऑपरेशन के काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। कम्प्रेशन स्टॉकिंग्स पहनना, पैर ऊँचे करके लेटना, वजन नियंत्रित रखना और नियमित पैदल चलना बहुत मदद करता है। छोटी नसों के लिए स्क्लेरोथेरेपी और लेजर उपचार (EVLT) जैसे बिना बड़े चीरे वाले आधुनिक तरीके भी उपलब्ध हैं। केवल गंभीर मामलों में सर्जरी की जरूरत पड़ती है।

वैरिकोस वेन्स में घंटों लगातार एक ही जगह खड़े या बैठे नहीं रहना चाहिए, पैरों पर पैर चढ़ाकर देर तक नहीं बैठना चाहिए, बहुत टाइट कपड़े और ऊँची एड़ी वाले जूते नहीं पहनने चाहिए, और फूली हुई नसों को जोर से रगड़ना या खरोंचना नहीं चाहिए। साथ ही बिना डॉक्टर की सलाह के लंबे समय तक कोई दवा नहीं लेनी चाहिए।

पैरों की नसों के फूलने (वैरिकोस वेन्स) के लिए जनरल सर्जन या वैस्कुलर विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए, जो डॉपलर अल्ट्रासाउंड से जांच कर सही इलाज तय करते हैं। संकल्प हॉस्पिटल, अंबिकापुर के जनरल एवं लैप्रोस्कोपिक सर्जरी विभाग में वैरिकोस वेन्स का आधुनिक इलाज (स्क्लेरोथेरेपी, लेजर/EVLT और सर्जरी) उपलब्ध है।

हाँ, डॉक्टर की सलाह से पहनी गई मेडिकल कम्प्रेशन स्टॉकिंग्स वैरिकोस वेन्स में बहुत फायदेमंद हैं। ये पैरों की नसों पर हल्का, नियंत्रित दबाव बनाकर खून को ऊपर की ओर बहने में मदद करती हैं, जिससे भारीपन, सूजन और थकान कम होती है और समस्या को बढ़ने से रोका जा सकता है।

ज्यादातर मामलों में वैरिकोस वेन्स गंभीर नहीं होतीं, लेकिन लंबे समय तक इलाज न होने पर ये त्वचा का रंग बदलने, लगातार सूजन, न भरने वाले घाव (venous ulcer) और कभी-कभी नस में खून का थक्का जमने जैसी समस्याएं पैदा कर सकती हैं। इसलिए लक्षण बढ़ने पर समय रहते विशेषज्ञ से जांच करवाना जरूरी है।

कई महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान हुई वैरिकोस वेन्स प्रसव के बाद कुछ हफ्तों या महीनों में अपने आप कम हो जाती हैं, क्योंकि नसों पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव कम हो जाता है। हालांकि अगर नसें बनी रहें, भारीपन या सूजन जारी रहे, तो डॉक्टर से जांच करवाकर कम्प्रेशन स्टॉकिंग्स या उचित इलाज लेना चाहिए।

हाँ, नियमित पैदल चलना, तैराकी और साइकिलिंग जैसी हल्की एक्सरसाइज वैरिकोस वेन्स में फायदेमंद हैं। चलते समय पिंडली की मांसपेशियां सिकुड़कर नसों में खून को ऊपर धकेलती हैं, जिससे खून का जमाव कम होता है। हालांकि बहुत भारी वजन उठाना और देर तक खड़े रहने वाले व्यायाम से बचना चाहिए।
Dr. Nilesh Goyal

MBBS, MS (General Surgery) - Consultant General & Laparoscopic Surgeon, Sankalp Hospital