General Surgery
क्या आपके पैरों की पिंडली या जांघ पर नीली-हरी, उभरी हुई और टेढ़ी-मेढ़ी नसें दिखाई देने लगी हैं? क्या देर तक खड़े रहने के बाद पैरों में भारीपन, थकान और सूजन महसूस होती है? पैरों की नसों का फूलना (Varicose Veins / वैरिकोस वेन्स) एक आम लेकिन धीरे-धीरे बढ़ने वाली समस्या है, जिसमें पैरों की नसों के अंदर मौजूद वाल्व कमजोर पड़ जाते हैं और खून का बहाव उल्टी दिशा में जमा होने लगता है। यह समस्या खासकर घंटों खड़े रहकर काम करने वालों, मोटापे से ग्रस्त लोगों, गर्भवती महिलाओं और बढ़ती उम्र के लोगों में देखी जाती है। सही समय पर ध्यान न देने पर यह त्वचा का रंग बदलने और घाव (venous ulcer) तक पहुंच सकती है। आइए इसके कारण, लक्षण, बचाव और आधुनिक इलाज को विस्तार से समझें।
"वैरिकोस वेन्स सिर्फ दिखने में खराब नसें नहीं हैं — यह पैरों की नसों के वाल्व कमजोर होने और खून का प्रवाह बिगड़ने का संकेत है, जिसे शुरुआत में ही संभालना सबसे आसान होता है।"
हमारे पैरों की नसों में छोटे-छोटे एकतरफा वाल्व (valves) होते हैं, जो खून को नीचे से ऊपर, हृदय की ओर बहाने में मदद करते हैं और उसे वापस नीचे गिरने से रोकते हैं। जब ये वाल्व कमजोर या खराब हो जाते हैं, तो खून का उल्टा बहाव होकर नसों में जमा होने लगता है, जिससे नसें फूल जाती हैं। इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार होते हैं:
यह वैरिकोस वेन्स का सबसे मुख्य कारण है। जब नसों के अंदर के वाल्व ठीक से बंद नहीं होते, तो खून ऊपर जाने के बजाय वापस नीचे जमा होने लगता है। इस जमाव (pooling) से नस पर दबाव बढ़ता है और वह धीरे-धीरे फूलकर उभरी और टेढ़ी दिखने लगती है।
जिन लोगों को अपने काम की वजह से घंटों लगातार खड़े रहना पड़ता है — जैसे शिक्षक, दुकानदार, सुरक्षाकर्मी, नर्स या फैक्ट्री कर्मचारी — उनके पैरों की नसों पर लगातार दबाव बना रहता है। इससे वाल्व जल्दी कमजोर होते हैं और नसें फूलने लगती हैं।
शरीर का अतिरिक्त वजन सीधे पैरों की नसों पर दबाव डालता है। ज्यादा वजन होने से नसों को खून ऊपर की ओर धकेलने में अधिक मेहनत करनी पड़ती है, जिससे वाल्व कमजोर होकर नसें फूल जाती हैं।
गर्भावस्था के दौरान शरीर में खून की मात्रा बढ़ जाती है और बढ़ता हुआ गर्भाशय पेट व पैरों की नसों पर दबाव डालता है। साथ ही हार्मोन में बदलाव नसों की दीवारों को ढीला कर देता है, जिससे कई महिलाओं में वैरिकोस वेन्स दिखने लगती हैं। हालांकि प्रसव के बाद अक्सर यह समस्या कुछ हद तक कम हो जाती है।
उम्र बढ़ने के साथ नसों और उनके वाल्व की लचक (elasticity) कम होने लगती है। कमजोर पड़ती नसें खून को ऊपर धकेलने में उतनी सक्षम नहीं रहतीं, इसलिए बढ़ती उम्र में वैरिकोस वेन्स होने की संभावना बढ़ जाती है।
अगर आपके माता-पिता या करीबी परिवार में किसी को वैरिकोस वेन्स की समस्या रही है, तो आपको भी यह होने की संभावना अधिक रहती है। कमजोर नसों की बनावट अक्सर आनुवंशिक रूप से आगे बढ़ती है।
पुरानी कब्ज (constipation) में मल त्याग के समय बार-बार जोर लगाने से पेट और पैरों की नसों पर दबाव बढ़ता है। यह लगातार दबाव भी नसों के वाल्व को कमजोर बनाकर वैरिकोस वेन्स की समस्या को बढ़ा सकता है।
वैरिकोस वेन्स के लक्षण शुरुआत में हल्के होते हैं और धीरे-धीरे बढ़ते हैं। समय रहते इन्हें पहचानना जरूरी है:
कई बार पैरों की नसों में खिंचाव या दर्द को लोग सामान्य थकान समझ लेते हैं। नस से जुड़ी अन्य समस्याओं जैसे नस चढ़ना को समझने के लिए यह लेख भी उपयोगी है।
वैरिकोस वेन्स की गंभीरता और खून के बहाव की स्थिति जानने के लिए डॉक्टर कुछ जांचें करते हैं:
शुरुआती अवस्था में जीवनशैली में कुछ बदलाव और सावधानियां वैरिकोस वेन्स को बढ़ने से रोकने में बहुत मदद करती हैं। ध्यान रहे — ये उपाय समस्या को नियंत्रित रखने में सहायक हैं, गंभीर स्थिति में डॉक्टरी इलाज का विकल्प नहीं:
डॉक्टर की सलाह से पहनी गई मेडिकल कम्प्रेशन स्टॉकिंग्स पैरों की नसों पर हल्का दबाव बनाकर खून को ऊपर की ओर बहने में मदद करती हैं। यह भारीपन, सूजन और थकान को काफी कम कर देती हैं।
दिन में कुछ बार पैरों के नीचे तकिया रखकर उन्हें हृदय के स्तर से थोड़ा ऊँचा करके लेटें। इससे जमा हुआ खून वापस बहने लगता है और नसों पर दबाव कम होता है।
संतुलित आहार से वजन को नियंत्रित रखें और रोजाना पैदल चलें। चलने से पिंडली की मांसपेशियां सिकुड़ती-फैलती हैं, जो नसों में खून को ऊपर धकेलने में मदद करती हैं। तैराकी और साइकिलिंग भी अच्छे विकल्प हैं।
अगर काम में लंबे समय तक खड़े रहना पड़ता है, तो बीच-बीच में थोड़ा चलें और पैरों को हिलाते-डुलाते रहें। इसी तरह देर तक एक ही स्थिति में बैठें नहीं और पैरों पर पैर चढ़ाकर बैठने से बचें।
फाइबरयुक्त भोजन, हरी सब्जियां, फल और पर्याप्त पानी लें ताकि कब्ज न हो और मल त्याग के समय जोर न लगाना पड़े। कम नमक वाला संतुलित आहार सूजन को भी कम रखता है।
अगर समस्या बढ़ जाए या लक्षण परेशान करने लगें, तो आज कई सुरक्षित और आधुनिक इलाज उपलब्ध हैं। हल्के मामलों में कम्प्रेशन स्टॉकिंग्स और जीवनशैली में बदलाव से राहत मिलती है। छोटी फूली नसों के लिए स्क्लेरोथेरेपी (Sclerotherapy) में एक खास दवा इंजेक्ट करके नस को बंद किया जाता है। बड़ी नसों के लिए बिना बड़े चीरे वाली आधुनिक तकनीक लेजर उपचार / EVLT (Endovenous Laser Treatment) बहुत असरदार है, जिसमें नस को अंदर से बंद कर दिया जाता है और मरीज जल्दी सामान्य जीवन में लौट आता है। गंभीर मामलों में सर्जरी की सलाह दी जा सकती है। कौन-सा इलाज सही रहेगा, यह डॉपलर जांच और नसों की स्थिति देखकर विशेषज्ञ सर्जन ही तय करते हैं। हमारे हमारे विभाग में इन सभी आधुनिक सुविधाओं की जानकारी उपलब्ध है।
| क्या करें (Do's) | क्या न करें (Don'ts) |
|---|---|
| डॉक्टर की सलाह से कम्प्रेशन स्टॉकिंग्स पहनें। | घंटों लगातार एक ही जगह खड़े या बैठे न रहें। |
| रोजाना पैदल चलें और पैरों की हल्की एक्सरसाइज करें। | बहुत टाइट कपड़े या ऊँची एड़ी वाले जूते न पहनें। |
| आराम करते समय पैरों को ऊँचा रखें। | पैरों पर पैर चढ़ाकर लंबे समय तक न बैठें। |
| वजन नियंत्रित रखें और फाइबरयुक्त आहार लें। | फूली नसों को जोर से रगड़ें या खरोंचें नहीं। |
अगर किसी फूली हुई नस से अचानक खून बहने लगे, पैर की त्वचा का रंग बदलकर गहरा या भूरा हो जाए, नस के पास ऐसा घाव बन जाए जो भरने का नाम न ले (venous ulcer), या पैर में तेज दर्द के साथ अचानक सूजन और गर्माहट हो — तो घरेलू उपायों पर निर्भर न रहें। यह वैरिकोस वेन्स के गंभीर होने या नस में खून का थक्का (clot) जमने का संकेत हो सकता है, जिसके लिए किसी अनुभवी डॉ. नीलेश गोयल जैसे विशेषज्ञ सर्जन से तुरंत जांच जरूरी है।
पैरों की नसों का फूलना एक ऐसी समस्या है, जिसे शुरुआत में नजरअंदाज करना आगे चलकर सूजन, दर्द, त्वचा के रंग बदलने और घाव तक पहुंचा सकता है। अच्छी बात यह है कि सही समय पर जीवनशैली में बदलाव, कम्प्रेशन स्टॉकिंग्स और आधुनिक इलाज से इस पर पूरी तरह काबू पाया जा सकता है। अगर आपके पैरों में उभरी नसें, भारीपन या लगातार सूजन रहती है, तो इसे टालें नहीं और समय रहते विशेषज्ञ से सलाह लें।
संकल्प हॉस्पिटल (अंबिकापुर) का जनरल एवं लैप्रोस्कोपिक सर्जरी विभाग वैरिकोस वेन्स की जांच (डॉपलर अल्ट्रासाउंड) से लेकर स्क्लेरोथेरेपी, लेजर उपचार (EVLT) और सर्जरी जैसे आधुनिक इलाज के लिए पूरी तरह सुसज्जित है। हमारे विशेषज्ञ डॉक्टर आपकी समस्या के मूल कारण का पता लगाकर सटीक और सुरक्षित इलाज देते हैं। परामर्श के लिए आज ही संपर्क करें या हमारे वरिष्ठ जनरल सर्जन डॉ. नीलेश गोयल से मिलें।