General Health
क्या सर्दियां आते ही आपकी एड़ी फटने लगती है और उसमें गहरी दरारें पड़ जाती हैं? कई बार ये दरारें इतनी गहरी हो जाती हैं कि चलने पर तेज दर्द होता है और कभी-कभी खून भी निकल आता है। फटी एड़ियां (Cracked Heels / Fissures) देखने में भले ही एक आम और मामूली समस्या लगती हो, लेकिन यह अक्सर त्वचा की नमी की कमी, शरीर में विटामिन व पोषक तत्वों की कमी, या डायबिटीज और थायरॉयड जैसी अंदरूनी बीमारियों का संकेत भी हो सकती है। आइए इस लेख में एड़ी फटने के सभी कारण, लक्षण, जरूरी जांच और सबसे असरदार रामबाण घरेलू उपाय विस्तार से समझते हैं।
"फटी एड़ियां सिर्फ रूखी त्वचा की निशानी नहीं हैं — कई बार ये शरीर में पानी, विटामिन और जरूरी तेल (नमी) की कमी, या डायबिटीज जैसी छिपी बीमारी की ओर इशारा करती हैं। समय रहते देखभाल जरूरी है।"
एड़ी की त्वचा हमारे शरीर के बाकी हिस्सों से ज्यादा मोटी और सख्त होती है, और उस पर सबसे ज्यादा दबाव पड़ता है। जब यह त्वचा नमी खोकर सूख जाती है और लचीलापन कम हो जाता है, तो वह फटने लगती है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं:
एड़ी फटने का सबसे आम कारण त्वचा का रूखापन और प्राकृतिक नमी की कमी है। जब एड़ी की त्वचा में मौजूद तेल और नमी कम हो जाती है, तो वह कठोर होकर फटने लगती है और उसमें दरारें पड़ जाती हैं।
सर्दियों में हवा में नमी बहुत कम हो जाती है, जिससे त्वचा जल्दी सूखती है। यही वजह है कि ज्यादातर लोगों की एड़ियां खासकर ठंड के मौसम में फटती हैं। गर्म पानी से बार-बार पैर धोना भी त्वचा का प्राकृतिक तेल छीन लेता है।
घंटों लगातार खड़े रहकर काम करने, सख्त फर्श पर नंगे पैर चलने, या खुली चप्पल पहनने से एड़ी पर लगातार दबाव और घर्षण पड़ता है। इससे त्वचा मोटी होकर फटने लगती है। अगर आपको एड़ी में दर्द भी रहता है, तो हमारा लेख एड़ी में दर्द के कारण और उपाय जरूर पढ़ें।
शरीर का ज्यादा वजन एड़ी की गद्दी (fat pad) पर अतिरिक्त दबाव डालता है, जिससे एड़ी की त्वचा किनारों से फैलती है और फटने लगती है। ज्यादा वजन वाले लोगों में यह समस्या आम है।
शरीर में विटामिन E, विटामिन B3 (नियासिन) और जिंक की कमी से त्वचा रूखी, बेजान और कमजोर हो जाती है। पोषक तत्वों की यह कमी एड़ी फटने का एक बड़ा लेकिन नजरअंदाज किया जाने वाला कारण है। संतुलित आहार न लेने वाले लोगों में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है।
डायबिटीज के मरीजों में हाई ब्लड शुगर के कारण त्वचा में गंभीर सूखापन आ जाता है और नसें कमजोर हो जाती हैं, जिससे पैरों में पसीना और प्राकृतिक नमी बनना कम हो जाता है। ऐसे में एड़ियां जल्दी फटती हैं और उनमें संक्रमण (infection) का खतरा भी बढ़ जाता है, इसलिए डायबिटीज के मरीजों को अपने पैरों की खास देखभाल करनी चाहिए।
थायरॉयड हार्मोन के असंतुलन (खासकर हाइपोथायरॉयडिज्म) में त्वचा रूखी हो जाती है और पसीना कम आता है, जिससे एड़ियां फटने लगती हैं। इसके अलावा फंगल इन्फेक्शन यानी एथलीट्स फुट (Athlete's Foot) के कारण भी एड़ी और पंजों की त्वचा फटती और छिलती है। ऐसी स्थिति में पैरों में खुजली भी हो सकती है।
पीछे से खुले जूते-चप्पल, बहुत सख्त तलवे वाले या सही नाप के न होने वाले फुटवियर एड़ी को खुला और असुरक्षित छोड़ देते हैं, जिससे धूल, रूखापन और घर्षण बढ़ता है और एड़ी फटने लगती है। लगातार खड़े रहने या तलवे में दर्द रहने पर हमारा लेख पैर के तलवे में दर्द भी सहायक है।
ज्यादातर मामलों में एड़ी फटना एक बाहरी और आम समस्या है, लेकिन बार-बार या गंभीर रूप से फटने पर डॉक्टर अंदरूनी कारण जानने के लिए ये जांच कर सकते हैं:
शुरुआती और सामान्य रूप से फटी एड़ियों के लिए ये घरेलू उपाय बहुत असरदार हैं। ध्यान रहे — ये उपाय नियमित देखभाल के लिए हैं और गंभीर या संक्रमित एड़ियों में डॉक्टरी सलाह जरूरी है:
सबसे असरदार उपाय है — रात को सोने से पहले एड़ियों पर अच्छा मॉइस्चराइज़र, नारियल तेल या पेट्रोलियम जेली लगाकर सूती मोजे पहन लें। इससे नमी पूरी रात त्वचा में बंद रहती है और सुबह तक एड़ियां मुलायम हो जाती हैं। कुछ ही दिनों में दरारें भरने लगती हैं।
एक टब में गुनगुना पानी लेकर उसमें 15-20 मिनट पैर भिगोएं। इसके बाद प्यूमिस स्टोन (झांवा पत्थर) से एड़ी की मोटी, मृत त्वचा को हल्के हाथों से रगड़कर साफ करें। ध्यान रहे — त्वचा को जोर से न रगड़ें और तुरंत बाद मॉइस्चराइज़र जरूर लगाएं। (डायबिटीज के मरीज त्वचा को रगड़ने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।)
शरीर में पानी की कमी भी त्वचा को रूखा बनाती है। दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से त्वचा अंदर से नम रहती है और एड़ियां जल्दी नहीं फटतीं।
अपने खाने में विटामिन E, विटामिन B3, जिंक और ओमेगा-3 से भरपूर चीजें जैसे हरी सब्जियां, मेवे, बीज, दूध और मौसमी फल शामिल करें। सही पोषण त्वचा को अंदर से मजबूत और मुलायम बनाता है।
पीछे से खुली चप्पल की जगह पीछे से बंद, गद्देदार और आरामदायक जूते पहनें। इससे एड़ी धूल, रूखेपन और घर्षण से बची रहती है और दरारें नहीं पड़तीं।
| क्या करें (Do's) | क्या न करें (Don'ts) |
|---|---|
| रोज रात एड़ियों पर मॉइस्चराइज़र लगाकर मोजे पहनें। | फटी एड़ियों की मृत त्वचा को नाखून या ब्लेड से न काटें। |
| दिनभर पर्याप्त पानी पिएं और पौष्टिक आहार लें। | बहुत देर तक गर्म पानी से पैर न धोएं, यह नमी छीनता है। |
| पीछे से बंद, आरामदायक और सही नाप के जूते पहनें। | सख्त फर्श पर लंबे समय तक नंगे पैर न चलें। |
| डायबिटीज या थायरॉयड होने पर पैरों की रोज जांच करें। | गहरी या खून वाली दरारों को नजरअंदाज न करें। |
अगर घरेलू उपायों के बावजूद एड़ी की दरारें ठीक न हों, दरारों से खून या मवाद निकल रहा हो, आसपास सूजन, लालिमा या तेज दर्द हो — तो देर न करें। खासकर डायबिटीज के मरीजों में गहरी दरारों से खून या मवाद आना और घाव का न भरना 'डायबिटिक फुट' का गंभीर संकेत हो सकता है, जिसमें संक्रमण तेजी से फैल सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत किसी अनुभवी डॉ. शैलेश गुप्ता जैसे फिजिशियन से जांच कराएं।
एड़ी फटना ज्यादातर मामलों में सही देखभाल, नियमित मॉइस्चराइजिंग, पर्याप्त पानी और पौष्टिक आहार से आसानी से ठीक हो जाता है। लेकिन अगर एड़ियां बार-बार फटें, दरारें गहरी हों या ठीक न हों, तो इसे हल्के में न लें — यह डायबिटीज, थायरॉयड या विटामिन की कमी जैसी अंदरूनी समस्या का संकेत हो सकता है, जिसकी जांच जरूरी है। पैरों से जुड़ी अन्य समस्याओं के लिए हमारे लेख पैर के तलवे में दर्द और पैरों में खुजली भी पढ़ें।
संकल्प हॉस्पिटल (अंबिकापुर) में अनुभवी फिजिशियन फटी एड़ियों के पीछे छिपे कारण — जैसे डायबिटीज, थायरॉयड और विटामिन की कमी — की सटीक जांच और आधुनिक इलाज करते हैं। खासकर डायबिटीज के मरीजों के लिए पैरों की देखभाल बहुत जरूरी है। परामर्श के लिए आज ही संपर्क करें या हमारे वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. शैलेश गुप्ता से मिलें।