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Home Health Blog | July 16, 2026 | 9 min read

पैर ठंडे रहने के कारण और उपाय (Cold Feet)

पैर ठंडे रहने के कारण और उपाय (Cold Feet)

क्या गर्मी के मौसम में भी आपके पैर बर्फ जैसे ठंडे रहते हैं? क्या रजाई या मोजे पहनने के बाद भी पैरों में गर्माहट नहीं आती? पैर ठंडे रहना (Cold Feet) एक बेहद आम समस्या है, जिसे ज्यादातर लोग मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन हमेशा पैरों में ठंडापन बना रहना सिर्फ ठंड का असर नहीं, बल्कि शरीर में खराब रक्त संचार, थायरॉयड की गड़बड़ी, खून की कमी (एनीमिया), डायबिटीज या नसों की कमजोरी का संकेत भी हो सकता है। आइए इसके सभी कारण, लक्षण, जरूरी जांच और असरदार घरेलू उपाय विस्तार से समझते हैं।

"पैरों का ठंडापन सिर्फ मौसम की बात नहीं है — यह अक्सर आपके शरीर में रक्त संचार, हार्मोन या नसों की सेहत का पहला संकेत होता है, जिसे समय रहते समझना जरूरी है।"

पैर ठंडे रहने के कारण

पैरों में लगातार ठंडापन कोई अकेली बीमारी नहीं, बल्कि कई अंदरूनी कारणों का लक्षण है। सही उपाय के लिए सही कारण पहचानना जरूरी है। आइए मुख्य कारणों को समझते हैं:

1. खराब रक्त संचार (Poor Blood Circulation / PAD)

पैर ठंडे रहने का सबसे आम कारण खराब रक्त संचार है। जब पैरों तक पर्याप्त गर्म खून नहीं पहुंच पाता, तो पैर ठंडे पड़ जाते हैं। बढ़ती उम्र, ज्यादा देर बैठे रहना और खासकर धमनियों में रुकावट (Peripheral Arterial Disease - PAD) इसका बड़ा कारण है। इसमें पैर की धमनियां सिकुड़ या ब्लॉक हो जाती हैं, जिससे चलने पर पिंडली में दर्द और पैरों में ठंडापन रहता है। अगर आपको साथ में पैरों में भारीपन भी महसूस होता है, तो इसे नजरअंदाज न करें।

2. थायरॉयड की कमी (हाइपोथायरायडिज्म)

थायरॉयड ग्रंथि हमारे शरीर के तापमान और मेटाबोलिज्म को नियंत्रित करती है। जब यह ग्रंथि कम हार्मोन बनाती है (हाइपोथायरायडिज्म), तो शरीर का मेटाबोलिज्म धीमा हो जाता है और शरीर पर्याप्त गर्मी नहीं बना पाता। इसका सीधा असर पैरों और हाथों पर पड़ता है, जो ठंडे रहने लगते हैं। साथ में थकान, वजन बढ़ना, बाल झड़ना और त्वचा का रूखापन भी हो सकता है।

3. खून की कमी (एनीमिया / आयरन की कमी)

शरीर में आयरन की कमी से खून में हीमोग्लोबिन कम हो जाता है, जिससे शरीर के अंगों तक ऑक्सीजन ठीक से नहीं पहुंच पाती। इसका नतीजा — हाथ-पैर ठंडे रहना, कमजोरी, चक्कर और त्वचा का पीलापन। महिलाओं में एनीमिया के कारण पैरों का ठंडापन बहुत आम है।

4. डायबिटिक न्यूरोपैथी (नसों की कमजोरी)

लंबे समय तक ब्लड शुगर बढ़े रहने से पैरों की नसें और छोटी रक्त वाहिकाएं कमजोर हो जाती हैं, जिसे डायबिटिक न्यूरोपैथी कहते हैं। इससे पैरों में ठंडापन, सुन्नपन और झनझनाहट महसूस होती है। कई बार पैर ठंडे लगते हैं लेकिन छूने पर सामान्य तापमान का होता है, क्योंकि दिक्कत नसों में होती है। अगर आपके पैर सुन्न होना जैसी समस्या भी रहती है, तो शुगर की जांच जरूर कराएं।

5. रेनॉड्स फेनोमेनन (Raynaud's Phenomenon)

यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें ठंड या तनाव के समय पैर और हाथ की उंगलियों की रक्त वाहिकाएं अचानक सिकुड़ जाती हैं। इससे उंगलियां पहले सफेद, फिर नीली और गरमाहट मिलने पर लाल पड़ जाती हैं। इस दौरान उंगलियां बहुत ठंडी और सुन्न महसूस होती हैं। यह समस्या ज्यादातर महिलाओं में और ठंडे मौसम में देखी जाती है।

6. विटामिन B12 की कमी

विटामिन B12 नसों की सेहत के लिए बहुत जरूरी है। इसकी कमी से पैरों की नसें कमजोर हो जाती हैं, जिससे ठंडापन, झनझनाहट, सुन्नपन और पैरों में जलन जैसी शिकायतें होती हैं। शाकाहारी लोगों में B12 की कमी अधिक पाई जाती है।

7. धूम्रपान और तनाव

धूम्रपान (सिगरेट/बीड़ी) रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ देता है, जिससे पैरों तक खून का बहाव कम हो जाता है और वे ठंडे पड़ते हैं। इसी तरह ज्यादा तनाव और चिंता के समय शरीर रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ देता है, जिससे हाथ-पैर ठंडे हो जाते हैं। लंबे समय तक तनाव और धूम्रपान रक्त संचार को स्थायी नुकसान पहुंचा सकते हैं।

पैर ठंडे रहने के लक्षण (Symptoms)

  • गर्म मौसम या कमरे में भी पैरों का लगातार ठंडा बने रहना।
  • मोजे या रजाई के बावजूद पैरों में गर्माहट न आना।
  • पैर की उंगलियों का रंग बदलना (सफेद, नीला या पीला पड़ना)।
  • पैरों में सुन्नपन, झनझनाहट या सुई चुभने जैसा अहसास।
  • पैरों की त्वचा का रूखा, पीला या चमकदार दिखना।
  • चलने पर पिंडली में दर्द या थकान (खराब रक्त संचार में)।
  • साथ में थकान, कमजोरी या चक्कर आना।

पैर ठंडे रहने की जांच (Diagnosis)

अगर पैरों का ठंडापन लंबे समय से बना है, तो इसके मूल कारण का पता लगाने के लिए डॉक्टर निम्नलिखित जांच की सलाह दे सकते हैं:

  • शारीरिक जांच: पैरों की नाड़ी (Pulse), त्वचा का रंग और तापमान देखना।
  • थायरॉयड टेस्ट (TSH): हाइपोथायरायडिज्म का पता लगाने के लिए।
  • ब्लड टेस्ट (CBC/हीमोग्लोबिन): एनीमिया और आयरन की कमी की जांच।
  • ब्लड शुगर (HbA1c): डायबिटीज और न्यूरोपैथी की जांच।
  • विटामिन B12 लेवल: नसों की कमजोरी का कारण जानने के लिए।
  • डॉपलर अल्ट्रासाउंड/ABI: पैर की धमनियों में रक्त प्रवाह और रुकावट (PAD) की जांच।

पैर ठंडे रहने के घरेलू उपाय (Home Remedies)

शुरुआती और सामान्य ठंडेपन में ये घरेलू उपाय बहुत असरदार हैं। ध्यान रहे — ये उपाय डॉक्टरी इलाज के सहायक हैं, विकल्प नहीं:

1. गुनगुने तेल से मालिश

सरसों, तिल या नारियल के गुनगुने तेल से पैरों और तलवों की हल्के हाथों से रोजाना मालिश करें। इससे रक्त संचार बढ़ता है, नसें सक्रिय होती हैं और पैरों को गर्माहट मिलती है। सोने से पहले मालिश करना सबसे फायदेमंद है।

2. गर्म पानी में पैर की सिकाई

एक टब में गुनगुना पानी लेकर उसमें 10-15 मिनट पैर डुबोकर बैठें। इससे रक्त वाहिकाएं खुलती हैं और पैरों में तुरंत गर्माहट व आराम मिलता है। (डायबिटीज के मरीज पानी का तापमान पहले हाथ से जांच लें, ताकि जलन न हो)।

3. गर्म मोजे और सही फुटवियर

ऊनी या सूती गर्म मोजे पहनकर सोएं। ठंडे फर्श पर नंगे पैर न चलें। आरामदायक और गद्देदार जूते पहनें ताकि पैरों में रक्त प्रवाह बना रहे और वे गर्म रहें।

4. नियमित एक्सरसाइज और पैदल चलना

रोजाना 30 मिनट पैदल चलना, पैर की उंगलियों को हिलाना और टखने घुमाने जैसे हल्के व्यायाम रक्त संचार को बेहतर बनाते हैं। एक ही जगह घंटों बैठे न रहें — बीच-बीच में उठकर टहलें।

5. संतुलित और पोषक आहार

आयरन युक्त आहार (हरी पत्तेदार सब्जियां, गुड़, चुकंदर, खजूर), विटामिन B12 (दूध, दही, अंडा) और गर्म तासीर वाली चीजें जैसे अदरक, लहसुन और दालचीनी लें। धूम्रपान पूरी तरह छोड़ दें, क्योंकि यह रक्त वाहिकाओं को सिकोड़कर ठंडापन बढ़ाता है।

क्या करें और क्या न करें (Do's & Don'ts)

क्या करें (Do's)क्या न करें (Don'ts)
रोजाना गुनगुने तेल से पैरों की मालिश करें।घंटों एक ही जगह बिना हिले-डुले न बैठें।
गर्म मोजे पहनें और पैरों को गर्म रखें।ठंडे फर्श पर नंगे पैर ज्यादा न चलें।
नियमित पैदल चलें और हल्का व्यायाम करें।धूम्रपान और तंबाकू का सेवन बिल्कुल न करें।
आयरन, विटामिन B12 युक्त पौष्टिक आहार लें।लगातार ठंडेपन को मामूली समझकर नजरअंदाज न करें।
थायरॉयड और शुगर की समय पर जांच कराएं।बिना जांच के लंबे समय तक अपने मन से दवा न लें।

डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?

अगर अचानक सिर्फ एक ही पैर ठंडा, नीला या पीला पड़ जाए, उसमें नाड़ी (Pulse) महसूस न हो, तेज दर्द हो, या पैर का कोई घाव लंबे समय से ठीक न हो रहा हो — तो यह धमनी में रुकावट (Arterial Blockage) का आपातकाल हो सकता है। इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें और तुरंत नजदीकी अस्पताल या किसी अनुभवी डॉ. शैलेश गुप्ता जैसे फिजिशियन से संपर्क करें। इसके अलावा अगर ठंडेपन के साथ लगातार सुन्नपन, कमजोरी या डायबिटीज है, तो भी जांच जरूरी है।

निष्कर्ष

पैरों का ठंडापन कई बार सिर्फ ठंड या खराब रक्त संचार की वजह से होता है, जिसे सही आदतों और घरेलू उपायों से आसानी से ठीक किया जा सकता है। लेकिन अगर यह समस्या लगातार बनी रहे या इसके साथ सुन्नपन, रंग बदलना, दर्द या थकान जैसे लक्षण हों, तो इसके पीछे थायरॉयड, एनीमिया, डायबिटीज या नसों की कमजोरी जैसा कोई गंभीर कारण हो सकता है। समय रहते सही जांच और इलाज से बड़ी परेशानी से बचा जा सकता है।

संकल्प हॉस्पिटल (अंबिकापुर) का जनरल मेडिसिन विभाग पैरों के ठंडेपन, रक्त संचार, थायरॉयड, एनीमिया और डायबिटीज जैसी समस्याओं की सटीक जांच और आधुनिक इलाज के लिए पूरी तरह सुसज्जित है। हमारे विशेषज्ञ डॉक्टर आपके ठंडेपन के मूल कारण का पता लगाकर सही इलाज देते हैं। परामर्श के लिए आज ही संपर्क करें या हमारे वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. शैलेश गुप्ता से मिलें।

Frequently Asked Questions

पैर हमेशा ठंडे रहने का सबसे आम कारण खराब रक्त संचार है, जिसमें पैरों तक पर्याप्त गर्म खून नहीं पहुंच पाता। इसके अलावा थायरॉयड की कमी (हाइपोथायरायडिज्म), खून की कमी (एनीमिया), विटामिन B12 की कमी, डायबिटीज से नसों की कमजोरी, धूम्रपान और तनाव भी पैरों को ठंडा बनाए रखते हैं। लगातार ठंडापन रहने पर इसका कारण जांच से पता लगाना जरूरी है।

हाँ, ठंडे पैर थायरॉयड की कमी (हाइपोथायरायडिज्म) का एक आम संकेत हो सकते हैं। थायरॉयड ग्रंथि शरीर के तापमान और मेटाबोलिज्म को नियंत्रित करती है। जब यह कम हार्मोन बनाती है, तो मेटाबोलिज्म धीमा हो जाता है और शरीर पर्याप्त गर्मी नहीं बना पाता, जिससे हाथ-पैर ठंडे रहते हैं। साथ में थकान, वजन बढ़ना और बाल झड़ना हो तो थायरॉयड (TSH) की जांच जरूर कराएं।

पैर ठंडे होने पर गुनगुने तेल (सरसों/तिल/नारियल) से रोजाना मालिश करें, गुनगुने पानी में 10-15 मिनट पैर की सिकाई करें, गर्म मोजे पहनें और नियमित पैदल चलें। आयरन व विटामिन B12 युक्त आहार लें, अदरक-लहसुन जैसी गर्म तासीर वाली चीजें खाएं और धूम्रपान छोड़ दें। ये उपाय रक्त संचार बढ़ाकर पैरों को गर्माहट देते हैं।

अगर अचानक सिर्फ एक ही पैर ठंडा, नीला या पीला पड़ जाए, उसमें नाड़ी महसूस न हो, तेज दर्द हो, या कोई घाव ठीक न हो रहा हो — तो यह धमनी में रुकावट का आपातकाल है और तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। इसके अलावा ठंडेपन के साथ लगातार सुन्नपन, कमजोरी, चक्कर या डायबिटीज हो तो भी बिना देरी जांच करानी चाहिए।

हाँ, आयरन की कमी से होने वाले एनीमिया में खून का हीमोग्लोबिन कम हो जाता है, जिससे शरीर के अंगों तक ऑक्सीजन ठीक से नहीं पहुंच पाती। इसका नतीजा हाथ-पैर ठंडे रहना, कमजोरी, चक्कर और त्वचा का पीलापन होता है। महिलाओं में यह समस्या अधिक देखी जाती है। ऐसे में हीमोग्लोबिन की जांच और आयरन युक्त आहार जरूरी है।

रेनॉड्स फेनोमेनन एक ऐसी स्थिति है जिसमें ठंड या तनाव के समय पैर और हाथ की उंगलियों की रक्त वाहिकाएं अचानक सिकुड़ जाती हैं। इससे उंगलियां पहले सफेद, फिर नीली और गरमाहट मिलने पर लाल पड़ जाती हैं, और बहुत ठंडी व सुन्न महसूस होती हैं। यह समस्या ज्यादातर महिलाओं में और ठंडे मौसम में होती है। बार-बार ऐसा होने पर डॉक्टर से जांच कराएं।

हाँ, लंबे समय तक ब्लड शुगर बढ़े रहने से पैरों की नसें और छोटी रक्त वाहिकाएं कमजोर हो जाती हैं (डायबिटिक न्यूरोपैथी), जिससे पैरों में ठंडापन, सुन्नपन और झनझनाहट होती है। डायबिटीज के मरीजों को पैरों की खास देखभाल करनी चाहिए और ब्लड शुगर (HbA1c) की नियमित जांच करानी चाहिए, क्योंकि इसमें घाव भी देर से भरते हैं।

पैर लगातार ठंडे रहने पर सबसे पहले जनरल फिजिशियन (Physician) को दिखाना चाहिए, जो थायरॉयड, एनीमिया, शुगर और रक्त संचार की जांच करके सही कारण का पता लगाते हैं। जरूरत पड़ने पर वे हृदय या नसों के विशेषज्ञ के पास भेज सकते हैं। संकल्प हॉस्पिटल, अंबिकापुर में अनुभवी फिजिशियन पैरों के ठंडेपन का आधुनिक इलाज करते हैं।
Dr. Shailesh Gupta

MBBS, MD (Medicine) - Senior Physician & Heart Specialist, Sankalp Hospital