General Medicine
क्या आपको रात को सोते समय पैरों के तलवों में सुइयां चुभने, झनझनाहट या तेज जलन (Burning Sensation) महसूस होती है? 'बर्निंग फीट सिंड्रोम' (Burning Feet Syndrome) या पैरों में जलन एक बहुत ही असुविधाजनक और आम समस्या है जो किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है, लेकिन यह बुजुर्गों और डायबिटीज के मरीजों में सबसे ज्यादा देखी जाती है। यह समस्या इतनी कष्टदायक हो सकती है कि मरीज को रातभर नींद नहीं आती और उन्हें अपने पैर ठंडे फर्श पर या ठंडे पानी में रखने पड़ते हैं। आइए जानते हैं इसके मुख्य कारण, लक्षण और सटीक इलाज के बारे में।
"पैरों में जलन महज एक थकावट का संकेत नहीं है; यह अक्सर नसों की कमजोरी (Neuropathy), खराब रक्त संचार या शरीर में महत्वपूर्ण विटामिन्स की कमी का शुरुआती अलार्म होता है।"
पैरों में जलन कोई बीमारी नहीं, बल्कि किसी अंदरूनी स्वास्थ्य समस्या का एक लक्षण है। इसके पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित कारण होते हैं:
पैरों में जलन का सबसे आम कारण डायबिटीज है। जब रक्त में शुगर (Glucose) का स्तर लंबे समय तक अनियंत्रित रहता है, तो यह पैरों तक जाने वाली छोटी नसों (Peripheral nerves) और रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है। इसके कारण पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन और आग जैसी जलन महसूस होती है। इसे परिधीय न्यूरोपैथी कहा जाता है।
विटामिन B12 और विटामिन B9 (फोलिक एसिड) हमारे तंत्रिका तंत्र (Nervous System) को स्वस्थ रखने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। हमारे देश में, विशेषकर शाकाहारी लोगों में, विटामिन B12 की कमी बहुत आम है। नसों का आवरण (Myelin sheath) कमजोर होने से पैरों में झनझनाहट और जलन शुरू हो जाती है।
जब हमारी किडनी (गुर्दे) ठीक से काम करना बंद कर देती हैं, तो वे रक्त से अपशिष्ट पदार्थों (Toxins) को बाहर नहीं निकाल पातीं। ये टॉक्सिन्स नसों में जमा होने लगते हैं, जिससे यूरिमिक न्यूरोपैथी (Uremic Neuropathy) होती है और पैरों में तेज जलन होती है।
लंबे समय तक ज्यादा शराब पीने से नसों को सीधा नुकसान पहुंचता है। इसके अलावा, अत्यधिक शराब के सेवन से शरीर में आवश्यक पोषक तत्वों (विशेषकर थायमिन/विटामिन B1) की कमी हो जाती है, जो पैरों में झनझनाहट और जलन का एक बड़ा कारण है।
यदि थायरॉयड ग्रंथि पर्याप्त मात्रा में हार्मोन नहीं बनाती है (अंडरएक्टिव थायरॉयड), तो यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देती है। इसके परिणामस्वरूप नसों पर दबाव बढ़ सकता है और तरल पदार्थ जमा हो सकता है, जिससे पैरों में जलन महसूस होती है।
यह एक फंगल इन्फेक्शन है जो मुख्य रूप से पैरों की उंगलियों के बीच पनपता है (विशेषकर जो लोग लगातार जूते और मोजे पहनते हैं)। इसमें पैरों में तेज खुजली, लालिमा, त्वचा का फटना और जलन जैसी समस्या होती है।
इस बीमारी में पैरों तक शुद्ध रक्त ले जाने वाली धमनियां सिकुड़ जाती हैं। खराब रक्त संचार के कारण पैरों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है, जिससे चलते समय पैरों में दर्द और आराम करते समय जलन महसूस होती है।
अक्सर मरीज पूछते हैं कि पूरे पैर की बजाय खास तौर पर पैर के तलवे में जलन क्यों होती है। इसका कारण यह है कि शरीर की सबसे लंबी नसें (Nerves) पैर के तलवों तक जाती हैं, इसलिए नसों की कमजोरी (Neuropathy) का असर सबसे पहले और सबसे ज्यादा तलवों पर ही महसूस होता है। तलवों में जलन के सबसे आम कारण हैं:
अगर तलवों की जलन रोज़ हो रही है या रात को नींद खराब कर रही है, तो सबसे पहले ब्लड शुगर (HbA1c) और विटामिन B12 की जांच जरूर करवाएं।
सही इलाज के लिए सही कारण का पता लगाना आवश्यक है। इसके लिए डॉक्टर निम्नलिखित जांच कर सकते हैं:
दवाइयों के साथ-साथ पैरों में जलन के ये घरेलू उपचार तुरंत राहत देते हैं। ध्यान रहे — ये रामबाण उपाय असली इलाज का विकल्प नहीं, बल्कि सहायक के रूप में अपनाएं:
यह सबसे त्वरित राहत देने वाला उपाय है। रात को सोने से पहले अपने पैरों को 15-20 मिनट के लिए सामान्य ठंडे पानी में डुबो कर रखें। ध्यान दें: बर्फ या बहुत ठंडे (Ice cold) पानी का इस्तेमाल न करें, क्योंकि इससे रक्त संचार और भी रुक सकता है और त्वचा को नुकसान पहुंच सकता है।
एप्सम सॉल्ट में मैग्नीशियम सल्फेट होता है जो नसों को आराम पहुंचाता है और सूजन को कम करता है। एक टब गुनगुने पानी में आधा कप एप्सम सॉल्ट मिलाएं और अपने पैरों को 15-20 मिनट तक उसमें भिगोएं। (डायबिटीज के मरीज इसे करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें)।
हल्दी में 'करक्यूमिन' (Curcumin) होता है जो एक प्राकृतिक एंटी-इंफ्लेमेटरी (सूजन-रोधी) और एंटी-ऑक्सीडेंट है। यह नसों के दर्द और जलन को कम करने में जादुई असर करता है। रात को सोने से पहले एक गिलास गर्म दूध में आधा चम्मच हल्दी और चुटकी भर काली मिर्च मिलाकर पिएं।
सरसों के तेल, जैतून के तेल (Olive oil) या नारियल के तेल को हल्का गुनगुना करके पैरों के तलवों की हल्के हाथों से मालिश करें। मालिश करने से पैरों में रक्त संचार (Blood circulation) बढ़ता है और थकी हुई नसों को आराम मिलता है।
सेब का सिरका शरीर के pH लेवल को संतुलित करता है। आप एक गिलास गर्म पानी में 1 चम्मच सेब का सिरका मिलाकर पी सकते हैं, या फिर पानी के टब में थोड़ा सिरका डालकर उसमें पैर भिगो सकते हैं (यह फंगल इन्फेक्शन में बहुत फायदेमंद है)।
| क्या करें (Do's) | क्या न करें (Don'ts) |
|---|---|
| विटामिन B12 युक्त आहार (दूध, दही, पनीर, अंडे) का सेवन बढ़ाएं। | शराब का अत्यधिक सेवन बिल्कुल बंद कर दें। |
| डायबिटीज है तो ब्लड शुगर को कड़ाई से नियंत्रण में रखें। | बहुत तंग (Tight) या ऊँची एड़ी (High heels) वाले जूते न पहनें। |
| रोजाना 30 मिनट पैदल चलें या योगा करें (रक्त संचार के लिए)। | लंबे समय तक एक ही जगह पर पैर लटकाकर न बैठें। |
| हमेशा सूती (Cotton) के आरामदायक मोजे पहनें। | बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दर्द निवारक गोली न खाएं। |
अगर पैरों में जलन के साथ-साथ सुन्नपन (Numbness) हो, पैर की उंगलियों में कोई घाव या कट लग गया हो जो ठीक नहीं हो रहा हो, जलन अचानक बहुत तेज हो जाए और पैरों से होते हुए टांगों तक पहुंच जाए, तो इसे घरेलू उपायों पर न छोड़ें। यह गंभीर न्यूरोपैथी का संकेत है और तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
पैरों में जलन एक ऐसी समस्या है जिसे नजरअंदाज करने से यह आपकी रातों की नींद हराम कर सकती है। यदि आपको या आपके परिवार में किसी को यह समस्या है, तो सबसे पहले अपने ब्लड शुगर और विटामिन लेवल की जांच कराएं।
संकल्प हॉस्पिटल (अंबिकापुर) का जनरल मेडिसिन और न्यूरोलॉजी विभाग डायबिटिक न्यूरोपैथी और तंत्रिका संबंधी रोगों के इलाज के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है। हमारे विशेषज्ञ डॉक्टर आपकी समस्या के मूल कारण (Root cause) का पता लगाकर आपको बेहतरीन चिकित्सा और परामर्श प्रदान करेंगे।