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Home Health Blog | May 07, 2026 | 15 min read

पैरों में झनझनाहट (झुनझुनी) होना कौन सी बीमारी है? कारण, इलाज और घरेलू उपचार

पैरों में झनझनाहट (झुनझुनी) होना कौन सी बीमारी है? कारण, इलाज और घरेलू उपचार

क्या आपने कभी महसूस किया है कि लगातार एक ही स्थिति (Posture) में बैठे रहने के बाद जब आप खड़े होते हैं, तो आपके पैरों में चींटियां चलने जैसा अहसास, गुदगुदी या 'सुइयां चुभने' जैसी झनझनाहट (Tingling) होती है? आम बोलचाल में इसे ही झुनझुनी, झनझनाहट या कुछ इलाकों में 'कनकनी' कहा जाता है। यही अहसास कई बार हाथों में, पैर के तलवों में या सिर्फ एक ही पैर (जैसे बाएं पैर) में भी हो सकता है। मेडिकल भाषा में इसे "पैरास्थीसिया" (Paresthesia) कहा जाता है। आमतौर पर यह कुछ मिनटों में ठीक हो जाता है। लेकिन, यदि यह झनझनाहट बार-बार हो रही है, बिना किसी कारण के हो रही है, या सुन्नपन (Numbness) के साथ लगातार बनी रहती है, तो यह किसी गंभीर तंत्रिका तंत्र (Nervous System) की बीमारी का संकेत हो सकता है। आइए इस समस्या की गहराई को समझें।

"पैरों में लगातार झनझनाहट या सुन्नपन को कभी भी 'आम बात' समझकर नहीं टालना चाहिए। यह अक्सर नसों के डैमेज होने की शुरुआत होती है। सही समय पर इलाज न होने पर यह स्थायी विकलांगता का कारण भी बन सकती है।"

पैरों में झनझनाहट होना कौन सी बीमारी का संकेत है? (Quick Answer)

ज्यादातर मामलों में हाथ-पैर में झनझनाहट "पेरिफेरल न्यूरोपैथी" यानी नसों के कमजोर या डैमेज होने का लक्षण है। इसके सबसे आम कारण हैं — डायबिटीज (हाई ब्लड शुगर), विटामिन B12 की कमी, और रीढ़ की नस का दबना (साइटिका)। नीचे दी गई तालिका से आप अपने लक्षणों के आधार पर संभावित बीमारी को जल्दी पहचान सकते हैं:

आपके लक्षण / पैटर्नसंभावित बीमारी
दोनों पैरों के तलवों में झनझनाहट व जलन, साथ में डायबिटीजडायबिटिक न्यूरोपैथी
हाथ-पैर दोनों में झुनझुनी + थकान + याददाश्त कमजोर होनाविटामिन B12 की कमी
कमर से एक ही पैर तक करंट जैसा दर्द व झनझनाहटसाइटिका (नस का दबना)
चलने पर पैरों में ऐंठन, पैरों का ठंडा पड़नापरिधीय धमनी रोग (PAD)
सुस्ती, वजन बढ़ना, कब्ज के साथ हाथ-पैर सुन्नहाइपोथायरायडिज्म (थायरॉयड)
अचानक कमजोरी, चेहरा टेढ़ा होना या बोलने में दिक्कतस्ट्रोक — तुरंत इमरजेंसी में जाएं

ध्यान दें, यह तालिका केवल शुरुआती समझ के लिए है। सही बीमारी का पता कुछ जरूरी जांचों (Blood Test, NCV) के बाद ही लगाया जा सकता है। आइए हर कारण को विस्तार से समझें।

पैरों में झनझनाहट क्यों होती है? जानिए मुख्य कारण

पैर में झनझनाहट के कारण और उपाय समझने के लिए सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि झनझनाहट होती क्यों है। पैरों में झनझनाहट और सुन्नपन के पीछे कई न्यूरोलॉजिकल (नसों से जुड़े) और सिस्टमिक (पूरे शरीर को प्रभावित करने वाले) कारण हो सकते हैं। सबसे प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:

1. डायबिटिक न्यूरोपैथी (Diabetic Neuropathy)

लगातार पैरों में झनझनाहट का सबसे बड़ा कारण मधुमेह (Diabetes) है। जब रक्त में शुगर का स्तर लंबे समय तक अधिक रहता है, तो यह शरीर की छोटी नसों (Peripheral nerves) को नुकसान पहुंचाता है। इसके कारण पैरों के तलवों से लेकर घुटनों तक जलन, झनझनाहट, दर्द और अंततः सुन्नपन आ जाता है। यदि आपको झनझनाहट के साथ ज्यादा प्यास लगती है या बार-बार पेशाब आता है, तो तुरंत अपना ब्लड शुगर चेक करवाएं।

2. नसों का दबना (Nerve Compression / Sciatica)

यदि आपकी कमर के निचले हिस्से (Lower back) में रीढ़ की हड्डी के बीच की डिस्क खिसक गई है (Herniated disc), तो वह वहां से निकलने वाली 'साइटिक नर्व' (Sciatic nerve) पर दबाव डालती है। इसके कारण कमर से लेकर पैरों के नीचे तक एक तेज दर्द और भयंकर झनझनाहट होती है जिसे साइटिका (Sciatica) कहते हैं।

3. विटामिन B12 की कमी (Vitamin B12 Deficiency)

विटामिन B12 तंत्रिकाओं (Nerves) के बाहरी सुरक्षा कवच (Myelin sheath) को बनाने और स्वस्थ रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसकी कमी होने पर यह कवच टूटने लगता है, जिससे तंत्रिकाएं सही से काम नहीं कर पातीं। इसका सीधा असर सबसे पहले हाथ-पैरों की नसों पर पड़ता है, इसलिए झनझनाहट किस विटामिन की कमी से होती है — इसका सबसे आम जवाब विटामिन B12 है। यह कमी शाकाहारी लोगों, बुजुर्गों और लंबे समय तक एसिडिटी की दवा लेने वालों में बहुत आम है।

विटामिन B12 की कमी से क्या होता है (लक्षण):

  • हाथ और पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन या सुई चुभने जैसा अहसास।
  • हर समय अत्यधिक थकान, कमजोरी और चक्कर आना।
  • याददाश्त कमजोर होना, ध्यान न लगना और चिड़चिड़ापन।
  • दिन भर सुस्ती और ज्यादा नींद आना।
  • जीभ में जलन, मुंह के छाले और त्वचा का पीलापन (एनीमिया)।

एक साधारण ब्लड टेस्ट से B12 का स्तर पता चल जाता है। समय पर इलाज न होने पर B12 की कमी से होने वाला नसों का नुकसान स्थायी हो सकता है, इसलिए इसे नजरअंदाज न करें।

4. परिधीय धमनी रोग (Peripheral Artery Disease - PAD)

यह रक्त संचार से जुड़ी एक बीमारी है जिसमें पैरों तक शुद्ध रक्त ले जाने वाली धमनियों (Arteries) में फैट (प्लाक) जमा हो जाता है और वे संकरी हो जाती हैं। पैरों तक पर्याप्त ऑक्सीजन और रक्त न पहुंचने के कारण उनमें झनझनाहट, ठंडक और चलते समय मांसपेशियों में ऐंठन (Cramps) होती है।

5. ऑटोइम्यून बीमारियां (Autoimmune Diseases)

रूमेटाइड अर्थराइटिस (RA), ल्यूपस या मल्टीपल स्केलेरोसिस (MS) जैसी बीमारियों में शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से अपनी ही स्वस्थ नसों और ऊतकों पर हमला करने लगता है। इसके कारण नसों में सूजन आ जाती है और पैरों में सुन्नपन व झनझनाहट शुरू हो जाती है।

6. थायरॉयड विकार (Hypothyroidism)

जब थायरॉयड ग्रंथि अंडरएक्टिव (कम सक्रिय) होती है, तो शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है। क्रोनिक हाइपोथायरायडिज्म के मामलों में, तरल पदार्थ का जमाव होने से नसों पर दबाव पड़ता है, जिससे परिधीय न्यूरोपैथी (Peripheral neuropathy) विकसित होती है।

अन्य महत्वपूर्ण कारण

  • अत्यधिक शराब का सेवन: लंबे समय तक भारी मात्रा में शराब पीने से नसों में विषाक्तता (Toxicity) फैलती है जिसे अल्कोहलिक न्यूरोपैथी कहते हैं।
  • दवाइयों के साइड इफेक्ट्स: कैंसर की कीमोथेरेपी (Chemotherapy), कुछ एंटीबायोटिक्स और हाई ब्लड प्रेशर की दवाइयां नसों पर असर डाल सकती हैं।
  • किडनी की विफलता (Kidney Failure): रक्त में यूरिया और अन्य टॉक्सिन्स के जमा होने (यूरेमिया) से भी नसों को नुकसान पहुंचता है।

पैर के तलवे में झनझनाहट या झुनझुनी क्यों होती है?

बहुत से लोगों को झनझनाहट सबसे पहले पैर के तलवों में महसूस होती है — जैसे तलवे पर चींटियां चल रही हों, मोजे पहने जैसा भारीपन हो या रात में तलवों में जलन व झुनझुनी बढ़ जाए। इसका कारण यह है कि शरीर की सबसे लंबी नसें पैर के तलवों तक जाती हैं, इसलिए नस डैमेज (Neuropathy) का असर सबसे पहले तलवों पर ही दिखता है। पैर के तलवे में झनझनाहट के प्रमुख कारण हैं:

  • डायबिटिक न्यूरोपैथी की शुरुआत: दोनों तलवों में झनझनाहट और जलन — जो रात में बढ़ जाती है — डायबिटीज से नस डैमेज का सबसे पहला संकेत है। यह लक्षण दिखते ही ब्लड शुगर (HbA1c) जरूर चेक करवाएं।
  • विटामिन B12 की कमी: तलवों और उंगलियों में सुई चुभने जैसी झुनझुनी B12 की कमी का शुरुआती लक्षण है।
  • टार्सल टनल सिंड्रोम (Tarsal Tunnel Syndrome): एड़ी के अंदरूनी हिस्से में नस दबने से तलवे में झनझनाहट और जलन होती है, जो ज्यादा चलने या खड़े रहने पर बढ़ती है।
  • देर तक खड़े रहना या सख्त फुटवियर: घंटों खड़े रहकर काम करने या बिना कुशन वाले सख्त जूते-चप्पल पहनने से तलवों की नसों पर दबाव पड़ता है।

यदि तलवों की झनझनाहट रोज हो रही है या रात में नींद खराब कर रही है, तो यह केवल थकान नहीं है — ब्लड शुगर और विटामिन B12 की जांच करवाकर न्यूरोलॉजिस्ट से मिलें।

सिर्फ एक ही पैर (बाएं या दाएं) में झनझनाहट क्यों होती है?

जब झनझनाहट दोनों पैरों में एक साथ हो, तो कारण अक्सर पूरे शरीर से जुड़ा होता है (जैसे डायबिटीज या विटामिन B12 की कमी)। लेकिन यदि झनझनाहट या सुन्नपन सिर्फ एक ही पैर में (जैसे केवल बाएं या दाएं पैर में) हो, तो इसका कारण आमतौर पर स्थानीय (Local) होता है, जैसे:

  • साइटिका / नस का दबना: रीढ़ की एक तरफ की नस दबने से उसी तरफ के पैर में करंट जैसी झनझनाहट कमर से नीचे तक जाती है।
  • देर तक पैर मोड़कर बैठना: पालथी मारकर या पैर पर पैर चढ़ाकर बैठने से एक पैर की नस दब जाती है और वह "सो" जाता है।
  • चोट या रक्त का थक्का: किसी एक पैर की नस में चोट या ब्लड क्लॉट (DVT) से भी एकतरफा झनझनाहट व सूजन हो सकती है।

यदि एक ही पैर की झनझनाहट के साथ अचानक तेज दर्द, सूजन या कमजोरी हो, तो इसे नजरअंदाज न करें और डॉक्टर से मिलें।

लक्षण जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए (Red Flag Symptoms)

पैरों में झनझनाहट के साथ यदि आपको इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे, तो तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट (Neurologist) से संपर्क करें:

  • झनझनाहट का अचानक शुरू होना और तेजी से पूरी टांगों में फैल जाना।
  • पैरों में इतनी कमजोरी आना कि चलने में लड़खड़ाहट हो या आप गिर जाएं (लखवा/Paralysis का संकेत)।
  • मूत्र या मल विसर्जन पर नियंत्रण न रहना (Bowel/Bladder Incontinence)।
  • झनझनाहट के साथ-साथ बोलने में लड़खड़ाहट या चेहरे का सुन्न होना (यह स्ट्रोक/Stroke का संकेत है, तुरंत इमरजेंसी में जाएं)।
  • पैरों में किसी घाव या कट का होना, जिसका आपको सुन्नपन के कारण दर्द महसूस न हो।

डॉक्टर सही कारण का पता कैसे लगाते हैं? (Diagnosis)

एक विशेषज्ञ न्यूरोलॉजिस्ट या जनरल फिजिशियन सटीक निदान के लिए निम्नलिखित परीक्षणों (Tests) की सलाह दे सकते हैं:

  • नर्व कंडक्शन वेलोसिटी (NCV) और EMG: यह टेस्ट यह मापता है कि आपकी नसें कितनी तेजी से और कितनी अच्छी तरह इलेक्ट्रिक सिग्नल भेज रही हैं। यह नसों के डैमेज का पता लगाने का सबसे सटीक तरीका है।
  • रक्त परीक्षण (Blood Tests): ब्लड शुगर (Fasting, PP, HbA1c), विटामिन B12, थायरॉयड प्रोफाइल (TSH), और किडनी फंक्शन (KFT) की जांच।
  • एमआरआई (MRI Spine): यदि डॉक्टर को संदेह है कि झनझनाहट का कारण रीढ़ की हड्डी में दबी हुई नस (Slip disc) है, तो कमर का एमआरआई किया जाता है।

हाथ-पैर में झनझनाहट का इलाज क्या है? (Treatment & Medicine)

झनझनाहट का इलाज उसके मूल कारण पर निर्भर करता है — यानी नस को नुकसान पहुंचाने वाली असली वजह को ठीक करना ही सबसे प्रभावी इलाज है। इसीलिए बिना जांच के कोई भी दवा खुद से लेना ठीक नहीं है। डॉक्टर आमतौर पर कारण के अनुसार इस तरह इलाज करते हैं:

  • डायबिटीज होने पर: ब्लड शुगर को सख्ती से कंट्रोल करना सबसे जरूरी है, क्योंकि यही आगे के नस डैमेज को रोकता है।
  • विटामिन B12 की कमी होने पर: डॉक्टर की सलाह पर मिथाइलकोबालामिन (Methylcobalamin) की गोलियां या इंजेक्शन दिए जाते हैं, जिससे कुछ हफ्तों–महीनों में राहत मिलती है।
  • नस के दर्द (Nerve Pain) के लिए: तेज झनझनाहट व दर्द में डॉक्टर प्रीगैबालिन (Pregabalin) या गैबापेंटिन (Gabapentin) जैसी नर्व-पेन की दवाएं लिख सकते हैं।
  • साइटिका / स्लिप डिस्क होने पर: फिजियोथेरेपी, दवाएं और गंभीर मामलों में नस का दबाव हटाने के लिए इलाज (या सर्जरी) की जरूरत पड़ सकती है।
  • सहायक दवाएं: कुछ मामलों में अल्फा-लिपोइक एसिड और न्यूरोट्रॉपिक विटामिन (B1, B6, B12) नसों की मरम्मत में मदद करते हैं।

पैरों में झनझनाहट होने पर कौन सी टेबलेट (Tablet) लेनी चाहिए?

यह पूरी तरह झनझनाहट के कारण पर निर्भर करता है — विटामिन B12 की कमी में मिथाइलकोबालामिन (Methylcobalamin) की टेबलेट, नस के तेज दर्द में प्रीगैबालिन (Pregabalin) या गैबापेंटिन (Gabapentin), और डायबिटीज में शुगर कंट्रोल करने वाली दवाएं दी जाती हैं। ध्यान रखें — मेडिकल स्टोर से पूछकर कोई भी 'झनझनाहट की टेबलेट' खुद लेना नुकसानदायक हो सकता है, क्योंकि बिना जांच के असली कारण पता ही नहीं चलता और सही इलाज में देरी से नस डैमेज बढ़ता जाता है।

चेतावनी: ऊपर बताई गई दवाएं केवल जानकारी के लिए हैं। इनमें से कोई भी दवा डॉक्टर की सलाह और सही खुराक के बिना न लें — गलत दवा नसों की समस्या को बढ़ा सकती है।

पैर में झनझनाहट और पैर सुन्न होने के घरेलू उपचार (Home Remedies)

पैर में झनझनाहट के घरेलू उपचार असली इलाज का विकल्प नहीं हैं, लेकिन मेडिकल इलाज के साथ-साथ ये उपाय झनझनाहट और पैर सुन्न होने की समस्या में काफी राहत देते हैं:

1. पैरों की गर्म सिकाई और मालिश (Warm Compress & Massage)

गर्म पानी से सिकाई करने या सरसों/जैतून के तेल को हल्का गर्म करके मालिश करने से पैरों में रक्त संचार (Blood circulation) बढ़ता है और मांसपेशियों को आराम मिलता है। (ध्यान दें: यदि आपके पैर सुन्न हैं, तो पानी का तापमान पहले हाथ से चेक करें ताकि पैर जले नहीं)।

2. विटामिन युक्त आहार (Nutrient-rich Diet)

विटामिन B12 और अन्य बी-विटामिन्स की कमी को पूरा करने के लिए अपने आहार में दूध, दही, पनीर, अंडे, मछली और हरी पत्तेदार सब्जियां शामिल करें। डॉक्टर की सलाह पर आप विटामिन B12 या न्यूरोट्रॉपिक विटामिन्स के सप्लीमेंट्स भी ले सकते हैं।

3. नियमित व्यायाम (Regular Exercise)

रोज 30 मिनट तेज गति से चलने (Brisk walking), तैराकी (Swimming) या साइकिल चलाने से पूरे शरीर, विशेषकर पैरों में रक्त का प्रवाह बेहतर होता है और नसों को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती है।

4. आरामदायक फुटवियर (Proper Footwear)

बहुत तंग जूते (Tight shoes) या हाई हील्स पहनने से पैरों की नसों पर सीधा दबाव पड़ता है। हमेशा ऐसे जूते पहनें जिनमें पैरों की उंगलियों को पर्याप्त जगह (Toe box) मिले और जो पैरों को अच्छा सपोर्ट दें।

निष्कर्ष

इस लेख में हमने पैर में झनझनाहट के कारण और उपाय — दोनों को विस्तार से समझा। पैर में झनझनाहट या झुनझुनी होना एक ऐसी समस्या है जो आपके रोजमर्रा के जीवन को गहराई से प्रभावित कर सकती है। यदि यह समस्या जीवनशैली में बदलाव, घरेलू उपचार या आराम करने से ठीक नहीं होती है, तो इसका मतलब है कि आपकी नसें मदद मांग रही हैं।

संकल्प हॉस्पिटल (अंबिकापुर) का न्यूरोलॉजी और इंटरनल मेडिसिन विभाग नसों से जुड़ी हर प्रकार की बीमारी के सटीक डायग्नोसिस (NCV, EMG, MRI) और उन्नत इलाज के लिए पूरी तरह से तैयार है। यदि आपको सुन्नपन, झनझनाहट या साइटिका की समस्या है, तो आज ही हमारे विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श लें और अपनी नसों को स्थायी डैमेज से बचाएं।

Frequently Asked Questions

हाँ, पैरों में झनझनाहट, जलन या सुई चुभने जैसा अहसास (Peripheral Neuropathy) नसों की कमजोरी या डैमेज होने का सबसे पहला और प्रमुख लक्षण है। यह अक्सर ब्लड शुगर बढ़ने (डायबिटीज), विटामिन B12 की कमी या रीढ़ की हड्डी में नस दबने के कारण होता है।

यदि झनझनाहट का मुख्य कारण केवल 'विटामिन B12 की कमी' है, तो डॉक्टर द्वारा दी गई विटामिन B12 की गोलियां या इंजेक्शन (Methylcobalamin) लेने से कुछ हफ्तों से लेकर महीनों के भीतर यह समस्या पूरी तरह ठीक हो सकती है। लेकिन यदि कारण डायबिटीज या नस दबना है, तो केवल विटामिन से पूरी राहत नहीं मिलेगी।

साधारण झनझनाहट आमतौर पर तलवों या पंजों में सीमित रहती है (जैसे डायबिटीज या विटामिन कमी में)। जबकि साइटिका में, नस रीढ़ की हड्डी (कमर) में दबती है, इसलिए दर्द और झनझनाहट एक करंट की तरह कमर (Lower back) से शुरू होकर कूल्हे (Hip) से होते हुए पैर के पिछले हिस्से तक नीचे जाती है।

लंबे समय तक पैर पर पैर चढ़ाकर या पालथी मारकर बैठने से घुटने के पास की 'पेरोनियल नर्व' (Peroneal nerve) पर दबाव पड़ता है। इससे पैर अस्थायी रूप से सुन्न (Sleepy foot) हो जाता है। आमतौर पर खड़े होने पर यह कुछ मिनटों में ठीक हो जाता है, लेकिन ऐसा रोज और घंटों तक करने से नसों पर स्थायी दबाव पड़ सकता है।

NCV टेस्ट यह जांचने के लिए किया जाता है कि नसें कितनी तेजी से और सही तरीके से बिजली के सिग्नल भेज रही हैं या नहीं। इससे यह पता चलता है कि नसें कहां और कितनी डैमेज हैं। इस टेस्ट में हल्के बिजली के झटके (Mild electrical impulses) दिए जाते हैं जो थोड़े असुविधाजनक (Uncomfortable) हो सकते हैं, लेकिन यह दर्दनाक या खतरनाक नहीं होता।

दुर्भाग्यवश, एक बार जब क्रोनिक हाई ब्लड शुगर से नसें स्थायी रूप से डैमेज हो जाती हैं, तो उन्हें 100% वापस पहले जैसा नहीं किया जा सकता। हालांकि, ब्लड शुगर को कड़ाई से कंट्रोल करके, नसों की दवाइयां (जैसे Pregabalin/Gabapentin) लेकर और जीवनशैली में बदलाव करके दर्द और झनझनाहट को काफी हद तक कम किया जा सकता है और आगे के डैमेज को रोका जा सकता है।

हाथ-पैरों में झनझनाहट का सबसे आम पोषण-संबंधी कारण विटामिन B12 की कमी है, क्योंकि B12 नसों की सुरक्षा परत को स्वस्थ बनाए रखता है। इसके अलावा विटामिन B1, B6 और विटामिन D की कमी से भी नसें प्रभावित हो सकती हैं। B12 की कमी शाकाहारी लोगों, बुजुर्गों और लंबे समय तक एसिडिटी की दवा लेने वालों में आम है, और एक साधारण ब्लड टेस्ट से इसका पता चल जाता है।

जब झनझनाहट और झुनझुनी हाथ व पैर दोनों में एक साथ हो और साथ में कमजोरी महसूस हो, तो यह अक्सर 'पेरिफेरल न्यूरोपैथी' (नसों की कमजोरी) का संकेत होता है। इसके सबसे आम कारण डायबिटीज, विटामिन B12 की कमी और थायरॉयड विकार हैं। यदि यह लगातार बनी रहे तो नर्व कंडक्शन टेस्ट (NCV) और ब्लड टेस्ट करवाकर सही कारण का पता लगाना चाहिए।

यदि झनझनाहट सिर्फ एक पैर में हो, तो इसका कारण आमतौर पर स्थानीय होता है — जैसे रीढ़ की एक तरफ की नस दबना (साइटिका), देर तक पैर मोड़कर बैठना, या किसी नस में चोट। जबकि दोनों पैरों की झनझनाहट अक्सर डायबिटीज या विटामिन B12 की कमी जैसे पूरे शरीर से जुड़े कारणों से होती है। एक पैर में अचानक झनझनाहट के साथ सूजन या तेज दर्द हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।

पैर के तलवे में झनझनाहट का सबसे आम कारण डायबिटिक न्यूरोपैथी की शुरुआत है — शरीर की सबसे लंबी नसें तलवों तक जाती हैं, इसलिए नस डैमेज का असर सबसे पहले तलवों में ही महसूस होता है। इसके अलावा विटामिन B12 की कमी, टार्सल टनल सिंड्रोम (एड़ी के पास नस दबना) और देर तक खड़े रहना भी तलवों की झुनझुनी के कारण हैं। यदि तलवों की झनझनाहट रात में बढ़ती है, तो ब्लड शुगर की जांच जरूर करवाएं।

झनझनाहट की कोई एक टेबलेट नहीं होती — दवा कारण पर निर्भर करती है। विटामिन B12 की कमी में मिथाइलकोबालामिन (Methylcobalamin), नस के तेज दर्द में डॉक्टर की पर्ची पर प्रीगैबालिन (Pregabalin) या गैबापेंटिन (Gabapentin), और डायबिटीज में शुगर कंट्रोल की दवाएं दी जाती हैं। मेडिकल स्टोर से पूछकर खुद कोई टेबलेट लेना नुकसानदायक हो सकता है — पहले जांच करवाकर असली कारण जानें।

पैर सुन्न होने पर गर्म पानी की सिकाई, सरसों या जैतून के तेल से हल्की मालिश, रोज 30 मिनट पैदल चलना, विटामिन B12 युक्त आहार (दूध, दही, पनीर, अंडे) और आरामदायक जूते पहनना — ये घरेलू उपाय रक्त संचार बढ़ाकर राहत देते हैं। लेकिन यदि सुन्नपन बार-बार हो रहा है या लगातार बना रहता है, तो यह नस डैमेज का संकेत हो सकता है — घरेलू उपायों के भरोसे न रहें और डॉक्टर से जांच करवाएं।
Dr. Chandra Mukesh Dhawde

Consultant Neurosurgeon, Sankalp Hospital

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