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Home Health Blog | July 21, 2026 | 10 min read

चलने पर पैरों में दर्द क्यों होता है? कारण और इलाज

चलने पर पैरों में दर्द क्यों होता है? कारण और इलाज

क्या थोड़ी दूर चलते ही आपके पैरों या पिंडलियों में तेज दर्द, जकड़न या ऐंठन शुरू हो जाती है और कुछ देर रुककर खड़े होते ही आराम मिल जाता है? चलने पर पैरों में दर्द (Leg Pain While Walking) को हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है। यह सिर्फ थकान या कमजोरी नहीं, बल्कि पैरों की धमनियों में खराब रक्त संचार (पेरिफेरल आर्टरी डिजीज), रीढ़ की नस दबने या हड्डी और मांसपेशियों की समस्या का संकेत हो सकता है। खासकर धूम्रपान करने वाले, डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल के मरीजों में यह लक्षण गंभीर बीमारी की ओर इशारा करता है। आइए इसके सभी कारण, लक्षण, जांच और असरदार उपाय विस्तार से समझते हैं।

"चलने पर दर्द और रुकने पर आराम — यह पैटर्न (जिसे डॉक्टरी भाषा में 'इंटरमिटेंट क्लॉडिकेशन' कहते हैं) अक्सर पैरों की धमनियों में रुकावट का पहला संकेत होता है, जिसे नजरअंदाज करना पैर और दिल दोनों के लिए भारी पड़ सकता है।"

चलने पर पैरों में दर्द के कारण

चलने पर पैरों में दर्द होना कोई अकेली बीमारी नहीं, बल्कि कई अंदरूनी कारणों का लक्षण है। सही इलाज के लिए असली कारण पहचानना बहुत जरूरी है:

1. पेरिफेरल आर्टरी डिजीज (PAD) — धमनियों का सिकुड़ना

यह चलने पर पैर दर्द का सबसे गंभीर और आम कारण है। जब पैरों की धमनियों में कोलेस्ट्रॉल जमने से वे सिकुड़ या ब्लॉक हो जाती हैं, तो चलते समय मांसपेशियों को पर्याप्त खून और ऑक्सीजन नहीं मिल पाता। इससे चलते ही पिंडली, जांघ या कूल्हे में दर्द होता है और रुकते ही आराम मिल जाता है — इसे 'इंटरमिटेंट क्लॉडिकेशन' कहते हैं। धूम्रपान, डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल के मरीजों में यह समस्या ज्यादा गंभीर होती है।

2. डायबिटीज और नसों की कमजोरी (Diabetic Neuropathy)

डायबिटीज के मरीजों में हाई ब्लड शुगर धीरे-धीरे पैरों की नसों और धमनियों दोनों को नुकसान पहुंचाता है। इससे चलने पर दर्द के साथ-साथ पैरों में जलन, झनझनाहट और सुन्नपन भी होता है। डायबिटीज के मरीजों में पैर के घाव देर से भरते हैं, इसलिए इन्हें विशेष सावधानी की जरूरत होती है। पैरों की जलन के बारे में विस्तार से जानने के लिए हमारा लेख पैरों में जलन के कारण और उपाय जरूर पढ़ें।

3. स्पाइनल स्टेनोसिस (रीढ़ की नस दबना)

रीढ़ की हड्डी की नली सिकुड़ने या डिस्क के दबाव से जब पैरों तक जाने वाली नसें दब जाती हैं, तो चलने या खड़े रहने पर पैरों में दर्द, भारीपन और कमजोरी महसूस होती है। इसमें अक्सर आगे झुककर बैठने या बैठ जाने पर आराम मिलता है। यह दर्द कमर से शुरू होकर जांघ और पिंडली तक फैल सकता है।

4. मांसपेशियों की कमजोरी और थकान

लंबे समय तक शारीरिक निष्क्रियता, कम प्रोटीन वाला आहार या अचानक ज्यादा चलने से पैरों की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। ऐसे में थोड़ा चलते ही मांसपेशियों में खिंचाव, ऐंठन और दर्द होने लगता है, जो आराम करने पर ठीक हो जाता है।

5. फ्लैट फीट और गलत जूते

जिन लोगों के पैर सपाट (Flat Feet) होते हैं या जो सख्त, घिसे हुए और गलत नाप के जूते पहनते हैं, उनके पैरों पर चलते समय असमान दबाव पड़ता है। इससे तलवे, एड़ी और पिंडली में दर्द और जल्दी थकान होती है। तलवे में दर्द के बारे में अधिक जानने के लिए तलवे में दर्द के कारण और उपाय पढ़ें।

6. कैल्शियम और विटामिन D की कमी

भारत में पैरों के दर्द का एक बहुत बड़ा कारण विटामिन D और कैल्शियम की कमी है। इनकी कमी से हड्डियां और मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, जिससे चलने पर पैरों में दर्द, ऐंठन और भारीपन बना रहता है।

7. गठिया और जोड़ों की समस्या (Arthritis)

घुटने, कूल्हे या टखने के जोड़ों में गठिया होने पर चलते समय जोड़ों में दर्द और अकड़न होती है, जिससे पैरों में भी दर्द फैल जाता है। जोड़ों के दर्द के इलाज की पूरी जानकारी के लिए हमारा लेख जोड़ों के दर्द का सबसे अच्छा इलाज जरूर पढ़ें।

लक्षण

  • थोड़ी दूर चलते ही पिंडली, जांघ या कूल्हे में दर्द, ऐंठन या जकड़न और रुकते ही आराम मिलना।
  • पैरों में भारीपन, कमजोरी और जल्दी थक जाना।
  • पैरों या पंजों का ठंडा पड़ना, त्वचा का रंग पीला या नीला दिखना।
  • पैरों में जलन, झनझनाहट या सुन्नपन का अहसास।
  • पैर के घाव या छाले का देर से भरना (खासकर डायबिटीज के मरीजों में)।
  • रात में सोते समय पैरों में ऐंठन या दर्द बढ़ना।

जांच

सही इलाज के लिए दर्द के असली कारण का पता लगाना जरूरी है। इसके लिए डॉक्टर निम्नलिखित जांच कर सकते हैं:

  • शारीरिक जांच और नाड़ी परीक्षण: डॉक्टर पैरों की नब्ज (Pulse), त्वचा का रंग और तापमान देखते हैं।
  • ABI टेस्ट (Ankle-Brachial Index): हाथ और टखने के ब्लड प्रेशर की तुलना करके धमनियों में रुकावट का पता लगाया जाता है।
  • डॉपलर अल्ट्रासाउंड/एंजियोग्राफी: पैरों की धमनियों में रक्त संचार और रुकावट देखने के लिए।
  • ब्लड टेस्ट: ब्लड शुगर (HbA1c), कोलेस्ट्रॉल, विटामिन D और कैल्शियम की जांच।
  • एक्स-रे या MRI: रीढ़ की नस दबने, हड्डी या जोड़ों की समस्या का पता लगाने के लिए।

घरेलू उपाय और बचाव

शुरुआती दर्द और बचाव में ये उपाय बहुत असरदार हैं। ध्यान रहे — ये उपाय डॉक्टरी इलाज के सहायक हैं, विकल्प नहीं:

1. नियमित और संतुलित पैदल चलना (Supervised Walking)

PAD के मरीजों के लिए डॉक्टर की सलाह से नियमित पैदल चलना सबसे असरदार इलाज माना जाता है। दर्द शुरू होने पर थोड़ा रुकें, फिर दोबारा चलें। रोजाना थोड़ा-थोड़ा चलने से समय के साथ धमनियों के आसपास नई रक्त वाहिकाएं बनती हैं और चलने की क्षमता बढ़ती है।

2. धूम्रपान पूरी तरह छोड़ें

धूम्रपान पैरों की धमनियों को सिकोड़कर रक्त संचार को और बिगाड़ देता है। PAD में सुधार के लिए धूम्रपान और तंबाकू पूरी तरह छोड़ना सबसे जरूरी कदम है। यह पैर और दिल दोनों की सुरक्षा करता है।

3. शुगर और कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करें

डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल के मरीज अपनी दवाइयां नियमित लें, संतुलित आहार खाएं और तली-भुनी व वसायुक्त चीजों से बचें। ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रण में रखना धमनियों को और सिकुड़ने से बचाता है।

4. सही जूते और स्ट्रेचिंग

मुलायम गद्देदार और सही नाप के जूते पहनें, नंगे पैर सख्त फर्श पर न चलें। रोजाना पिंडली और पैरों की हल्की स्ट्रेचिंग करने से मांसपेशियों में लचीलापन और रक्त संचार बढ़ता है, जिससे ऐंठन और दर्द कम होता है।

5. संतुलित आहार और पानी

हरी सब्जियां, प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन D से भरपूर आहार लें, धूप में कुछ देर बैठें और दिनभर पर्याप्त पानी पिएं। इससे हड्डियां और मांसपेशियां मजबूत रहती हैं और ऐंठन कम होती है।

क्या करें और क्या न करें (Do's & Don'ts)

क्या करें (Do's)क्या न करें (Don'ts)
डॉक्टर की सलाह से रोजाना नियमित पैदल चलें।धूम्रपान और तंबाकू का सेवन बिल्कुल न करें।
ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर नियंत्रण में रखें।पैर के ठंडेपन, नीलेपन या घाव को नजरअंदाज न करें।
गद्देदार, आरामदायक और सही नाप के जूते पहनें।दर्द के बावजूद बिना रुके लगातार लंबी दूरी न चलें।
संतुलित आहार लें और पर्याप्त पानी पिएं।बिना जांच के लंबे समय तक दर्द निवारक गोली न खाएं।

डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?

अगर चलने पर पैर का दर्द बार-बार लौट रहा हो, पैर या पंजे ठंडे पड़ रहे हों, त्वचा का रंग पीला या नीला हो रहा हो, आराम करते समय भी दर्द बना रहे, या पैर का कोई घाव ठीक न हो रहा हो — तो यह आपातकाल हो सकता है, बिल्कुल देर न करें। धूम्रपान करने वाले, डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल के मरीजों में यह पेरिफेरल आर्टरी डिजीज (PAD) का गंभीर संकेत है, जिसमें समय पर इलाज न मिलने से पैर को स्थायी नुकसान हो सकता है। तुरंत किसी अनुभवी फिजिशियन या ऑर्थोपेडिक विभाग से जांच कराएं।

निष्कर्ष

चलने पर पैरों में दर्द को सिर्फ उम्र या थकान समझकर नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। ज्यादातर मामलों में सही जीवनशैली, धूम्रपान त्यागने, नियमित पैदल चलने, शुगर-कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल और सही जूतों से यह समस्या काफी हद तक ठीक हो जाती है। लेकिन अगर दर्द के साथ पैर ठंडा पड़ना, रंग बदलना या घाव न भरना जैसे लक्षण हों, तो बिना देर किए विशेषज्ञ से जांच जरूर कराएं।

संकल्प हॉस्पिटल (अंबिकापुर) का मेडिसिन और हृदय रोग विभाग पैरों के दर्द, खराब रक्त संचार (PAD), डायबिटीज और हृदय संबंधी समस्याओं के आधुनिक इलाज के लिए पूरी तरह सुसज्जित है। हमारे विशेषज्ञ डॉक्टर आपके दर्द के मूल कारण का पता लगाकर सटीक इलाज देते हैं। परामर्श के लिए आज ही संपर्क करें या हमारे वरिष्ठ फिजिशियन एवं हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. शैलेश गुप्ता से मिलें।

Frequently Asked Questions

थोड़ा चलते ही पैरों या पिंडलियों में दर्द होना और रुकते ही आराम मिलना अक्सर पैरों की धमनियों में खराब रक्त संचार (पेरिफेरल आर्टरी डिजीज) का संकेत है। इसे 'इंटरमिटेंट क्लॉडिकेशन' कहते हैं। इसके अलावा रीढ़ की नस दबना, मांसपेशियों की कमजोरी या विटामिन D और कैल्शियम की कमी भी इसका कारण हो सकती है। बार-बार ऐसा होने पर जांच जरूर कराएं।

हाँ, चलने पर पैर दर्द का एक बड़ा कारण पेरिफेरल आर्टरी डिजीज (PAD) है, जिसमें धमनियों में कोलेस्ट्रॉल जमने से रुकावट आती है। यही प्रक्रिया दिल की धमनियों में भी हो सकती है, इसलिए PAD वाले मरीजों में हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। धूम्रपान, डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल के मरीजों को इसे गंभीरता से लेना चाहिए।

चलने पर पैर दर्द के लिए सबसे पहले फिजिशियन (जनरल मेडिसिन) या हृदय रोग विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए, क्योंकि इसका आम कारण रक्त संचार की समस्या (PAD) है। अगर दर्द रीढ़ या जोड़ों से जुड़ा हो, तो ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ से सलाह लें। संकल्प हॉस्पिटल, अंबिकापुर में अनुभवी डॉक्टर पैरों के दर्द के मूल कारण की जांच कर सटीक इलाज करते हैं।

शुरुआती दर्द में डॉक्टर की सलाह से नियमित थोड़ा-थोड़ा पैदल चलना सबसे असरदार है। धूम्रपान पूरी तरह छोड़ें, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल रखें, सही गद्देदार जूते पहनें, रोजाना पिंडली की स्ट्रेचिंग करें और संतुलित आहार लें। ये उपाय सहायक हैं, लेकिन लगातार दर्द रहने पर डॉक्टरी जांच जरूरी है।

हाँ, यह एक गंभीर चेतावनी है। पैर या पंजे का ठंडा पड़ना, त्वचा का रंग पीला या नीला दिखना और घाव का न भरना यह दर्शाता है कि पैर तक पर्याप्त खून नहीं पहुंच रहा। यह पेरिफेरल आर्टरी डिजीज की गंभीर अवस्था हो सकती है, जिसमें तुरंत इलाज न मिलने पर पैर को स्थायी नुकसान का खतरा रहता है। ऐसे में बिना देर किए डॉक्टर से मिलें।

हाँ, डायबिटीज के मरीजों में हाई ब्लड शुगर पैरों की नसों और धमनियों दोनों को नुकसान पहुंचाता है, जिससे चलने पर दर्द, जलन और सुन्नपन होता है। इनमें पैर के घाव देर से भरते हैं और संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है। इसलिए डायबिटीज के मरीजों को अपने पैरों की नियमित जांच और शुगर नियंत्रण पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

हाँ, PAD के मरीजों के लिए डॉक्टर की देखरेख में नियमित पैदल चलना (Supervised Walking) सबसे असरदार इलाजों में से एक है। दर्द होने पर रुकें, फिर दोबारा चलें। धीरे-धीरे रोजाना अभ्यास से धमनियों के आसपास नई रक्त वाहिकाएं बनती हैं और बिना दर्द के ज्यादा दूर चलने की क्षमता बढ़ती है।
Dr. Shailesh Gupta

MBBS, MD (Medicine) - Senior Physician & Heart Specialist, Sankalp Hospital