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Home Health Blog | July 20, 2026 | 9 min read

हाथों और पैरों में ज्यादा पसीना आना (Hyperhidrosis) — कारण और उपाय

हाथों और पैरों में ज्यादा पसीना आना (Hyperhidrosis) — कारण और उपाय

क्या आपकी हथेलियां और तलवे अक्सर पसीने से भीग जाते हैं, फिर चाहे मौसम ठंडा ही क्यों न हो? किसी से हाथ मिलाने, फोन पकड़ने या कॉपी-किताब पर लिखने में शर्मिंदगी होती है? हाथ पैर में ज्यादा पसीना आना एक आम समस्या है जिसे चिकित्सा भाषा में हाइपरहाइड्रोसिस (Hyperhidrosis) कहते हैं। ज्यादातर मामलों में यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता, लेकिन कभी-कभी यह शरीर के अंदर चल रही किसी समस्या की ओर भी इशारा करता है। इस लेख में हम आसान हिंदी में समझेंगे कि हाथों में पसीना आने का कारण क्या है, यह किस बीमारी का लक्षण हो सकता है, और इसे कम करने के कारगर उपाय क्या हैं।

संक्षेप में — हाथ-पैर में ज्यादा पसीना आना:

  • ज्यादातर मामलों में यह हानिरहित प्राइमरी फोकल हाइपरहाइड्रोसिस होता है, जो अक्सर बचपन या किशोरावस्था से शुरू होता है।
  • चिंता-तनाव, थायरॉइड का बढ़ना, ब्लड शुगर कम होना, मेनोपॉज, बुखार या कुछ दवाएं भी कारण हो सकती हैं।
  • हाथ-पैर सूखे रखना, एंटीपर्सपिरेंट, सांस लेने वाले जूते-मोजे और तनाव प्रबंधन से काफी राहत मिलती है।
  • अचानक ठंडा पसीना + सीने में दर्द या तेज धड़कन हो, तो यह आपातकाल है — तुरंत अस्पताल जाएं।

हाथों में पसीना आने का कारण क्या है?

पसीना आना शरीर का एक सामान्य और जरूरी काम है — यह शरीर के तापमान को नियंत्रित रखता है। जब गर्मी लगती है, व्यायाम करते हैं या घबराहट होती है, तो पसीने की ग्रंथियां (Sweat Glands) सक्रिय हो जाती हैं। ये ग्रंथियां हमारे मस्तिष्क के एक हिस्से और तंत्रिका तंत्र (Nervous System) से जुड़ी होती हैं।

कुछ लोगों में हथेलियों, तलवों और बगल की पसीना ग्रंथियां जरूरत से ज्यादा सक्रिय रहती हैं और बिना किसी खास वजह के भी पसीना बहाती रहती हैं। इसी अति-सक्रियता को हाइपरहाइड्रोसिस कहते हैं। यह दो तरह का होता है — प्राइमरी (सीधे ग्रंथियों की अति-सक्रियता) और सेकेंडरी (किसी और बीमारी या दवा के कारण)

हाथ पैर में ज्यादा पसीना आना — मुख्य कारण

हर व्यक्ति में कारण अलग हो सकता है। नीचे सबसे आम कारण दिए गए हैं:

1. प्राइमरी फोकल हाइपरहाइड्रोसिस

यह सबसे आम कारण है। इसमें केवल कुछ खास हिस्से — हथेलियां, तलवे, बगल या माथा — दोनों तरफ बराबर पसीना बहाते हैं। इसका कोई गंभीर कारण नहीं होता, यह अक्सर बचपन या किशोरावस्था से शुरू होता है और परिवार में चल सकता है (आनुवंशिक)। नींद में आमतौर पर यह पसीना बंद हो जाता है।

2. चिंता और मानसिक तनाव (Anxiety और Stress)

घबराहट, डर, इंटरव्यू, परीक्षा या भीड़ में जाने पर हाथ-पैर पसीने से भीग जाना बहुत आम है। तनाव के समय शरीर एड्रेनालाईन हार्मोन छोड़ता है, जो पसीना बढ़ा देता है।

3. थायरॉइड का बढ़ना (Hyperthyroidism)

जब थायरॉइड ग्रंथि जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाती है, तो पूरे शरीर में पसीना, गर्मी लगना, वजन घटना, हाथ कांपना और दिल की धड़कन तेज होना जैसे लक्षण दिखते हैं।

4. ब्लड शुगर कम होना (Hypoglycemia)

डायबिटीज के मरीजों में दवा या इंसुलिन के बाद शुगर अचानक गिर जाए, तो ठंडा-चिपचिपा पसीना, कंपकंपी, कमजोरी, चक्कर और तेज भूख महसूस होती है। ऐसे में तुरंत कुछ मीठा लेना जरूरी है।

5. मेनोपॉज और हार्मोनल बदलाव

45 वर्ष के आसपास की महिलाओं में मेनोपॉज के दौरान अचानक गर्मी लगना और पसीना आना (Hot Flashes) आम है। यह हार्मोन में बदलाव की वजह से होता है।

6. संक्रमण, बुखार और कुछ दवाएं

किसी भी संक्रमण या बुखार में शरीर पसीने के जरिए तापमान कम करता है। इसके अलावा कुछ दवाएं (जैसे कुछ बुखार व दर्द की दवाएं, कुछ मानसिक रोगों की दवाएं) भी पसीना बढ़ा सकती हैं।

पसीने का पैटर्नसंभावित कारणक्या करें
सिर्फ हथेली, तलवे व बगल में, दोनों तरफ बराबर, बचपन सेप्राइमरी फोकल हाइपरहाइड्रोसिसत्वचा रोग विशेषज्ञ से सलाह लें
घबराहट, इंटरव्यू या भीड़ में हाथ भीगनाचिंता / तनाव (Anxiety)तनाव प्रबंधन, जरूरत पर काउंसलिंग
पूरे शरीर में पसीना, वजन घटना, धड़कन तेज, हाथ कांपनाथायरॉइड बढ़ना (Hyperthyroidism)थायरॉइड जांच (TSH) कराएं
अचानक ठंडा पसीना, कमजोरी, चक्कर, तेज भूखलो ब्लड शुगर (Hypoglycemia)तुरंत कुछ मीठा लें, शुगर जांचें
रात में पसीना व गर्मी (महिलाएं 45+)मेनोपॉज / हार्मोनल बदलावस्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श
रात का पसीना + बिना कारण वजन घटना, बुखार या खांसीगंभीर बीमारी की आशंकाबिना देरी डॉक्टर से जांच कराएं

ज्यादा पसीना आना किस बीमारी का लक्षण है?

यह जरूरी नहीं कि ज्यादा पसीना हमेशा किसी बीमारी का संकेत हो — ज्यादातर लोगों में यह हानिरहित प्राइमरी हाइपरहाइड्रोसिस ही होता है। लेकिन अगर पसीना अचानक शुरू हुआ हो, पूरे शरीर में हो, रात में हो या अन्य लक्षणों के साथ आए, तो यह इन स्थितियों का संकेत हो सकता है:

  • थायरॉइड का बढ़ना (Hyperthyroidism)
  • डायबिटीज में ब्लड शुगर का कम या ज्यादा होना
  • संक्रमण या लंबे समय से चल रहा बुखार (जैसे टीबी)
  • हृदय संबंधी समस्या — खासकर सीने में दर्द के साथ ठंडा पसीना
  • कुछ मामलों में मानसिक तनाव या एंग्जायटी डिसऑर्डर

इसलिए यदि पसीने का पैटर्न बदल गया है या साथ में अन्य लक्षण हैं, तो डॉक्टर से जांच कराना समझदारी है।

हथेलियों में पसीना और घबराहट — क्या यह चिंता का संकेत है?

बहुत से लोगों में हथेलियों में पसीना और घबराहट साथ-साथ आती है। जब मन बेचैन या तनाव में होता है, तो शरीर का सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम सक्रिय हो जाता है और हाथ-पैर पसीने से भीगने लगते हैं, दिल तेज धड़कता है और हाथ ठंडे पड़ जाते हैं। यह ज्यादातर सामान्य चिंता की प्रतिक्रिया होती है।

लेकिन कभी-कभी घबराहट और ठंडा पसीना किसी शारीरिक आपात स्थिति का भी संकेत हो सकता है, जैसे लो ब्लड शुगर या हृदय की समस्या। इसलिए अगर घबराहट के साथ सीने में दर्द, सांस फूलना या बेहोशी जैसा महसूस हो, तो इसे केवल तनाव मानकर टालें नहीं।

पसीना आना किस विटामिन की कमी से होता है?

यह एक आम सवाल है — पर सच यह है कि ज्यादा पसीना आना सीधे तौर पर किसी एक विटामिन की कमी से नहीं होता। प्राइमरी हाइपरहाइड्रोसिस का किसी विटामिन की कमी से कोई संबंध नहीं है। हालांकि, कुछ बातें ध्यान देने योग्य हैं:

  • विटामिन D और विटामिन B12 की कमी से कमजोरी, थकान और कभी-कभी रात में पसीना जैसी शिकायतें कुछ लोगों में देखी जाती हैं — पर यह सीधा कारण नहीं, बल्कि सामान्य कमजोरी का हिस्सा है।
  • खून की कमी (एनीमिया) और ब्लड शुगर का गिरना भी पसीने व कमजोरी का कारण बन सकते हैं।

इसलिए बिना जांच के अपने आप विटामिन की गोलियां शुरू न करें। सही कारण जानने के लिए डॉक्टर से मिलकर जरूरी जांच (जैसे थायरॉइड, शुगर, विटामिन स्तर) कराना बेहतर है।

पसीना कम करने के घरेलू उपाय और बचाव

ज्यादातर हल्के मामलों में कुछ आसान उपायों से काफी राहत मिल जाती है। पसीना कम करने के घरेलू उपाय और सावधानियां इस प्रकार हैं:

  • हाथ-पैर सूखे रखें: दिन में कई बार साफ रुमाल या टिश्यू से हथेलियां और तलवे पोंछें। नमी बैक्टीरिया व फंगस को बढ़ाती है।
  • एंटीपर्सपिरेंट का उपयोग: सामान्य डियोड्रेंट के बजाय एल्युमिनियम क्लोराइड युक्त एंटीपर्सपिरेंट रात को साफ, सूखी त्वचा पर लगाने से पसीना कम होता है। इसे हथेली-तलवे पर लगाने से पहले डॉक्टर की सलाह लें।
  • सांस लेने वाले जूते-मोजे: सूती मोजे और चमड़े या जालीदार जूते पहनें; रोज मोजे बदलें और जूते सुखाकर पहनें। पैरों में पाउडर लगाना मददगार होता है।
  • सूती और ढीले कपड़े: सिंथेटिक कपड़ों से बचें जो हवा नहीं आने देते।
  • तनाव प्रबंधन: रोज गहरी सांस के व्यायाम, प्राणायाम, योग या हल्की सैर से घबराहट और पसीना दोनों कम होते हैं।
  • ट्रिगर से बचें: बहुत तीखा-मसालेदार खाना, ज्यादा चाय-कॉफी, कैफीन और शराब पसीना बढ़ा सकते हैं — इन्हें सीमित करें।
  • पर्याप्त पानी पिएं: शरीर को हाइड्रेट रखने से तापमान नियंत्रण बेहतर रहता है।

ध्यान रहे — ये उपाय लक्षणों को कम करने में सहायक हैं, किसी अंतर्निहित बीमारी का इलाज नहीं। अगर पसीना बना रहे तो डॉक्टर से जरूर मिलें।

गंभीर मामलों में मेडिकल इलाज

अगर घरेलू उपायों से राहत न मिले और पसीना रोजमर्रा की जिंदगी में बाधा बन रहा हो, तो डॉक्टर की देखरेख में कई प्रभावी इलाज उपलब्ध हैं:

  • प्रिस्क्रिप्शन एंटीपर्सपिरेंट: तेज असर वाले एल्युमिनियम क्लोराइड सॉल्यूशन।
  • आयनटोफोरेसिस (Iontophoresis): हल्के करंट वाली पानी की थेरेपी, जो हथेली-तलवे के पसीने में असरदार है।
  • दवाएं: कुछ स्थितियों में मुंह से ली जाने वाली दवाएं पसीने को कम करती हैं।
  • बोटॉक्स इंजेक्शन: बगल व हथेली की पसीना ग्रंथियों को कुछ महीनों के लिए शांत करता है।
  • मूल कारण का इलाज: अगर थायरॉइड, शुगर या कोई संक्रमण कारण है, तो उसका इलाज होने पर पसीना अपने आप कम हो जाता है।

कौन-सा इलाज आपके लिए सही है, यह डॉक्टर जांच के बाद ही तय करते हैं। खुद से कोई दवा शुरू न करें।

डॉक्टर के पास कब जाएं?

कुछ स्थितियों में पसीना गंभीर समस्या का संकेत होता है। इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें:

  • अचानक ठंडा-चिपचिपा पसीना जिसके साथ सीने में दर्द या दबाव, बाएं हाथ या जबड़े में दर्द, सांस फूलना या तेज धड़कन हो — यह हार्ट अटैक का संकेत हो सकता है, तुरंत इमरजेंसी में जाएं
  • रात में बार-बार पसीना जिसके साथ बिना कारण वजन घटना, लगातार बुखार या लंबी खांसी हो — तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं।
  • पसीने के साथ बहुत ज्यादा कमजोरी, चक्कर या बेहोशी जैसा महसूस होना (लो ब्लड शुगर हो सकता है)।
  • पसीना अचानक शुरू हुआ हो, पूरे शरीर में हो या रोजमर्रा की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित कर रहा हो।

निष्कर्ष

हाथों और पैरों में ज्यादा पसीना आना अक्सर हानिरहित होता है, लेकिन यह आत्मविश्वास और रोजमर्रा के कामों को प्रभावित कर सकता है — और कभी-कभी यह शरीर के अंदर की किसी समस्या का संकेत भी हो सकता है। अच्छी बात यह है कि सही कारण पहचानकर और उचित उपाय अपनाकर अधिकांश लोगों को अच्छी राहत मिल जाती है। साफ-सफाई, सूखापन, तनाव प्रबंधन और जरूरत पड़ने पर सही मेडिकल इलाज इस समस्या को काफी हद तक संभाल सकते हैं।

अगर आपका पसीना लंबे समय से बना हुआ है, अचानक बढ़ गया है या साथ में अन्य लक्षण हैं, तो संकल्प हॉस्पिटल (अंबिकापुर) के जनरल मेडिसिन और त्वचा रोग विभाग के विशेषज्ञ आपकी सही जांच और इलाज में मदद कर सकते हैं। बेहतर सलाह के लिए आज ही हमारे डॉक्टरों से परामर्श लें और बेझिझक जीवन जिएं।

Frequently Asked Questions

ज्यादातर मामलों में हाथों में पसीना आने का कारण प्राइमरी फोकल हाइपरहाइड्रोसिस होता है, जिसमें हथेलियों की पसीना ग्रंथियां जरूरत से ज्यादा सक्रिय रहती हैं। यह अक्सर बचपन या किशोरावस्था से शुरू होता है और हानिरहित होता है। इसके अलावा चिंता-तनाव, थायरॉइड का बढ़ना और हार्मोनल बदलाव भी कारण हो सकते हैं।

ज्यादा पसीना आना सीधे तौर पर किसी एक विटामिन की कमी से नहीं होता। हालांकि विटामिन D या B12 की कमी और खून की कमी से आने वाली सामान्य कमजोरी में कुछ लोगों को पसीना व थकान महसूस हो सकती है। सही कारण जानने के लिए बिना जांच के गोलियां शुरू करने के बजाय डॉक्टर से थायरॉइड, शुगर और विटामिन स्तर की जांच कराएं।

ज्यादातर लोगों में ज्यादा पसीना किसी बीमारी का संकेत नहीं, बल्कि हानिरहित हाइपरहाइड्रोसिस होता है। लेकिन अगर पसीना अचानक शुरू हो, पूरे शरीर में हो या रात में आए, तो यह थायरॉइड का बढ़ना, ब्लड शुगर का असंतुलन, संक्रमण या हृदय संबंधी समस्या का संकेत हो सकता है। ऐसे में डॉक्टर से जांच जरूरी है।

जब मन तनाव या डर में होता है, तो शरीर का सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम सक्रिय हो जाता है, जिससे हथेलियां पसीने से भीगती हैं और दिल तेज धड़कता है। यह अक्सर सामान्य चिंता की प्रतिक्रिया होती है। लेकिन अगर साथ में सीने में दर्द, सांस फूलना या बेहोशी जैसा हो, तो इसे केवल तनाव न मानें और तुरंत डॉक्टर से मिलें।

हाथ-पैर को बार-बार पोंछकर सूखा रखें, सूती मोजे व सांस लेने वाले जूते पहनें और एल्युमिनियम क्लोराइड युक्त एंटीपर्सपिरेंट का उपयोग करें। तीखा खाना, ज्यादा चाय-कॉफी और शराब सीमित करें, तथा गहरी सांस के व्यायाम व योग से तनाव कम करें। ये उपाय लक्षण कम करते हैं, पर लगातार समस्या रहने पर डॉक्टर से मिलें।

आमतौर पर यह खतरनाक नहीं होता, पर कुछ स्थितियों में सतर्क रहना जरूरी है। अगर अचानक ठंडा पसीना सीने में दर्द या तेज धड़कन के साथ आए, तो तुरंत इमरजेंसी में जाएं क्योंकि यह हार्ट अटैक का संकेत हो सकता है। रात का पसीना बिना कारण वजन घटने, बुखार या खांसी के साथ हो, या पसीना रोजमर्रा की जिंदगी बिगाड़ रहा हो, तो डॉक्टर से जांच कराएं।
Dr. Shailesh Gupta

MBBS, MD - Consultant Physician, Sankalp Hospital

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